जयपुर। राइट टू हेल्थ बिल के विरोध में प्रदेश के निजी अस्पताल के चिकित्सकों और राज्य सरकार के बीच चल रहे गतिरोध को सुलझाने के लिए दौर शुरू हो गया है। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के साथ निजी चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल की बातचीत शुरू हो गयी है। साथ ही चिकित्सकों की एक मशाल यात्रा सीकर के लिए भी रवाना होगी। सरकार और चिकित्सकों के इस गतिरोध के बीच निजी अस्पतालों ने सरकारी योजना के तहत इलाज करने से भी इंकार करना शुरू कर दिया है।
गौरतलब है कि कल शाम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर निजी चिकित्सकों का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा था, जिसमें शामिल डॉ वीरेंद्र से सीएम की वार्ता हुई और निजी डॉक्टर्स का पक्ष वार्ता में रखा गया। जिससे विवाद का कोई समाधान निकाला जा सके। वार्ता में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को सरकार और निजी चिकित्सकों के बीच मध्यस्थता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज निजी चिकित्सकों का प्रतिनिधिमंडल डोटासरा से उनके आवास पर वार्ता कर अपना पक्ष रखेगा। माना जा रहा है कि प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रस्तावित वार्ता में एक कमेटी का गठन किया जा सकता है जिसमें तीन मंत्रियों के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी शामिल होंगे जिन्होंने बिल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इन अधिकारियों के साथ भी आज निजी चिकित्सकों की वार्ता की संभावना है।
सीकर के जाएगी मशाल यात्रा
आंदोलन कर रहे निजी चिकित्सकों के मुताबिक उन्होंने आमजन को आरटीएच बिल से होने वाले नुकसान की जानकारी देने के लिए एक मशाल यात्रा निकालने का भी निर्णय लिया है,यात्रा यहां से सीकर जाएगी और वहां से प्रदेश के अन्य जिलों में जाएगी, यात्रा में शामिल डॉक्टर जिलों,गांव, ढाणियों में लोगों को बताएंगे आरटीएच बिल के नुकसान की जानकारी देंगे।
राइट टू हेल्थ के विरोध में अब निजी अस्पतालों ने सरकारी योजनाओं के तहत मरीज का इलाज करने से भाी इंकार कर दिया है। 100 अस्पतालों ने लिखित में इस संबंध में अपने पत्र आईएमए और पीएचएनएस पदाधिकारियों को सौंप दिए हैं। यहां तक कि अस्पतालों ने कहा है कि एक अप्रेल तक 80 फीसदी अस्पताल सभी तरह की सरकारी योजनाओं से डी-एमपेनल्ट हो जाएंगे।
अनशन भी लगातार जारी
बिल के विरोध में निजी चिकित्सकों का विरोध भी जारी है। जेएमए सभागार में एक महिला डॉक्टर नीलम खंडेलवाल का आमरण अनशन का आज दूसरा दिन हैं तो वही तीन चिकित्सक क्रमिक अनशन पर हैं।
निजी चिकित्सकों के समर्थन में ज्वाइंट एक्शन कमेटी
इसी बीच चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी रविकांत से हुई वार्ता के बाद रेजिडेंटस ने काम पर लौटने की घोषणा कर दी थी लेकिन जार्ड जॉइंट एक्शन कमेटी ने आंदोलन की कमान अपने हाथ में लेते हुए हडताल जारी रखने का एलान कर दिया था, उनका कहना है कि जार्ड के पदाधिकारी गायब हैं, उनके मोबाइल बंद हैं और वह पूरी तरह निजी डॉक्टर्स के समर्थन में हैं और जब तक वे पीछे नहीं हटेंगे, हड़ताल जारी रहेगी।