जयपुर। राज्य में राइट टू हैल्थ (Righ To Health) के विरोध में चल रहा चिकित्सकों का आंदोलन गंभीर मरीजों और प्रसूताओं के लिए बड़ी मुसीबत का कारण बन गया है। कई जिलों में प्रसूताओं को सरकारी अस्पताल का ही सहारा लेना पड़ रहा है। कई गंभीर मरीजों को अस्पताल में जगह नहीं मिल रही और उन्हें घर पर ही हड़ताल खत्म होने का इंतजार करना पड़ रहा है। हड़ताल के दौरान 12 दिन में राज्य में करीब 10 हजार रुटीन ऑपरेशन प्रभावित होने का अनुमान है। अब इन्हें कब की तारीख मिलेगी, यह बताने वाला भी कोई नहीं है। वहीं, राहत की खबर है कि सरकारी डॉक्टर और जूनियर रेजिडेंट गुरुवार सुबह 9 बजे से काम पर लौट आएंगे। इससे, कई दिनों से इलाज के लिए भटक रहे मरीजों को फायदा मिलेगा।
निजी में इलाज नहीं मिलने के बावजूद प्रदेश के सबसे बड़े सवाईमानसिंह अस्पताल (SMS Hospital) और जेकेलोन (JK Lone) आउटडोर में भी आम दिनों की तुलना में 65 प्रतिशत घट गए हैं। एसएमएस में प्रतिदिन औसतन करीब 10 हजार मरीजों का आउटडोर प्रतिदिन रहता है, लेकिन हड़ताल के कारण यह बुधवार को करीब 3500 ही रहा।
…और इन वादों पर मान गए रेजिडेंट
– सीनियर रेजिडेंट (Senior Resident) के पदों पर नियुक्त हुए सीनियर रेजिडेंट को वर्तमान वेतन में डीए के साथ एचआरए दिए जाने के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग को तत्काल भेजा जाएगा
– प्रवेश वर्ष 2020 और उसके बाद प्रवेश पाने वाले रेजिडेंट्स के लिए बाॅंड नीति के अंतर्गत सीनियर रजिडेंट आवंटन प्रक्रिया की प्रभावी नीति बनाने के लिए रेजिडेंट एसोसिएशन के पदा धिकारियों को स म्मिलत किया जाएगा और उसके पश्चात नियु क्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा
– रेजिडेंट डॉक्टर्स को पूर्व में दिए जा रहे एचआरए में में बढ़ोत्तरी किए जाने के लिए वित्त विभाग को तत्काल प्रस्ताव भेजा जाएगा
– रेजिडेंट डॉक्टर्स (Resident Doctor) , सीनियर रेजिडेंट, डीएनबी रेजिडेंट्स के के कार्य बहिष्कार की अव धि को डे ऑफ, राजकीय अवकाश में समायोजित किया जाएगा और वेतन में कटौती नहीं की जाएगी
इलाज नहीं मिलने से मौतों की चिंता नहीं
स्वास्थ्य विभाग (Rajasthan Health Department) ने सभी जिलों से बंद और खुले अस्पतालों की जानकारी तो मांगी है, लेकिन हड़ताल के कारण कितनी मौतें हुई, इसका अंदाजा विभाग को भी नहीं है। हड़ताल के समर्थन में बुधवार को सरकारी मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक शिक्षकों और सेवारत चिकित्सकों ने भी कार्य बहिष्कार किया। जिसके कारण मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की व्यवस्थाएं भी बेपटरी हो गई। रेजिडेंट डॉक्टर पहले से बहिष्कार पर हैं।
रेजिडेंट का पंजीकरण रद्द करने की चेतावनी
निजी चिकित्सकों की हड़ताल के समर्थन में कार्य बहिष्कार कर रहे रेजिडेंट डॉक्टरों पर अब सरकार एक्शन लेने की तैयारी में है। चिकित्सा विभाग ने एक आदेश जारी कर सभी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रकों को आदेश दिए हैं कि आंदोलन के दौरान मरीजों के परिजन से दुर्व्यवहार करने, राजकीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और कर्तव्यों के प्रति लापरवाही बरतने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों का पंजीकरण रद्द किया जाए।
चिड़ावा : हड़ताल ने ली युवक की जान
चिड़ावा (झुंझुनूं ) @पत्रिका. निजी चिकित्सकों की हड़ताल और सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं होने से एक युवक की मौत हो गई। कुछ दिन पहले ही सूरजगढ़ के निकट घरडू गांव निवासी नगेश भडिय़ा (36 ) का दिल्ली के निजी अस्पताल में ट्रांसप्लांट हुआ था। मंगलवार शाम उसे सांस में तकलीफ होने पर परिजनों ने दिल्ली के डॉक्टर से संपर्क किया तो उन्होंने मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाकर वेंटिलेटर पर लेने की सलाह दी। परिजन युवक को लेकर चिड़ावा पहुंचे। निजी अस्पतालों हड़ताल के कारण डॉक्टर नहीं मिले। सरकारी अस्पताल गए, लेकिन वहां वेंटिलेटर नहीं होने के कारण उसने दम तोड़ दिया। इस बारे में चिड़ावा सीएचसी प्रभारी डॉ.सुमननलता कटेवा ने कहा कि सीएचसी में वेंटीलेटर की सुविधा नहीं है।