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पटरी पर लौट रहा आरटीआइ, सूचना दिलाने में लाएंगे तेजी

आरटीआइ दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सीआइसी गुप्ता ने दिलाया भरोसासामाजिक कार्यंकर्ता अरूणा रॉय ने पीआइओ की ट्रेनिंग नहीं होने पर सवाल उठाया

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जयपुर। सूचना का अधिकार प्रदेश में अब पटरी पर लौट रहा है। राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त डी बी गुप्ता ने यह खुलासा करते हुए प्रदेशवासियों को भरोसा दिलाया कि सूचना दिलाने के कार्य में तेजी लाने और आरटीआई के सिस्टम को आइटी फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने जुर्माने की वसूली से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का जिक्र भी किया। सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रॉय ने लोगों की समस्याओं के साथ ही लोक सूचना अधिकारियों का प्रशिक्षण नहीं होने का सवाल उठाया। इस अवसर पर आरटीआइ को लेकर 9 प्रस्ताव भी पारित किए गए।

विभिन्न जन संगठनों की ओर से मंगलवार को सूचना का अधिकार की 16वीं वर्षगांठ पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त डी बी गुप्ता ने कार्यक्रम में उठाएं मुद्दों पर जवाब दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम का प्रयोग व प्रतिदिन ज्यादा अपीलों की सुनवाई करके जल्द सूचना दिलाना आयोग का लक्ष्य है। आरटीआइ की मजबूती के लिए सामाजिक संस्थाओं और आरटीआई आवेदकों के साथ हर 3 माह में संवाद शुरु किया जाएगा। आयोग के फैसले भी अब वेबसाइट पर एक सप्ताह में उपलब्ध हो जाएंगे।
3 प्रतिशत ही कर रहे आरटीआइ का इस्तेमाल
सूचना आयुक्त नारायण बारेठ ने बताया कि आयोग के काम में तेजी आने से अब राज्य आयोग में नई अपील भी तेजी से आ रही हैं। हालोंकि देश में आरटीआइ का इस्तेमाल अब भी 3 प्रतिशत लोग ही कर रहे हैं।
अगले साल आयोग मनाए आरटीआइ दिवस
कार्यक्रम में मांग उठी कि अगले साल से राज्य सूचना आयोग प्रदेश में आरटीआइ दिवस मनाए, जिस पर आयोग की ओर से सकारात्मक जवाब दिया। मजदूर किसान शक्ति संगठन से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता अरुण रॉय ने कहा कि आयोग तक आरटीआइ के मामले ही कितने से आते हैं, ज्यादातर मामले आयोग तक आते ही नहीं है। निखिल डे ने कहा कि सरकार प्रयास करे मामले प्रथम अपील से आगे जाएं ही नहीं।
गोष्ठी में पारित प्रस्ताव-
— प्रदेश में प्रतिवर्ष 12 अक्टूबर को आरटीआई की स्थिति रिपोर्ट प्रकाशित होगी।
— आरटीआई उपयोगकर्ताओं के मुद्दों पर चर्चा के लिए हर तीन माह में राज्य स्तरीय बैठक।
— सभी जिलों में आरटीआई जागरुकता मेलों का आयोजन
— विशेषज्ञों के सहयोग से विभिन्न मुद्दों पर सामाजिक अंकेक्षण।
— सूचना आयोग की वार्षिक जन सुनवाई/खुला मंच आयोजित कराना।
— जन सूचना पोर्टल व अन्य माध्यम से सूचनाओं को बाहर लाना।
— सूचना मांगने वालों में सुरक्षा का भाव पैदा करना।
— सामाजिक जवाबदेही कानून के लिए जन आंदोलन।
— सूचना आयोग से नियमित संवाद

अनपढ़ों पर सवाल उठाने की निंदा
राजस्थान के जनसंगठनों ने अनपढ़ों को बोझ बताने वाले केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की निंदा भी की।