
प्रदेश भर में कई निजी बसें बिना परमिट व फिटनेस के चल रही हैं, लेकिन राजस्थान पत्रिका द्वारा किए गए स्टिंग में नागौर में ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें एक ही नम्बर से दो निजी बसें चलाई जा रही हैं। नागौर-सालासर के बीच दौड़ रही दोनों बसें सुबह जिला मुख्यालय से निकलती हैं और शाम को जिला मुख्यालय आकर एक ही स्थान पर पास-पास खड़ी की जाती हैं। इसके बावजूद न तो पुलिस को ये बसें नजर आ रही हैं और न ही परिवहन विभाग के अधिकारियों को। दो बसों पर एक ही नम्बर लगाकर बस संचालक सरकार को राजस्व का चूना लगा रहा है। परिवहन विभाग का कहना है कि यह मोटर व्हीकल एक्ट का खुला उल्लंघन है। एक ही व्यक्ति द्वारा जानबूझकर ऐसा किया जाता है तो अपराध भी है।
कलाकारी ऐसी कि किसी को दिखे ही नहीं
दोनों निजी बसों पर आगे-पीछे संचालक ने एक ही नम्बर लिखा रखे हैं, लेकिन कलाकारी ऐसी की हुई है कि हर किसी को यह दिखे नहीं। आगे की नम्बर प्लेट के ऊपर संचालक ने अलग-अलग डिजायन में बम्पर गार्ड लगा रखे हैं, जिसके चलते आसानी से नम्बर दिखाई नहीं देते हैं। वहीं बसों के पीछे लगी प्लेट पर एक पर स्टीकर लगा रखा है, जबकि दूसरी पर नम्बर साफ दिखाई दे रहे हैं। दोनों ही बसों की नाम, डिजायन व रंग लगभग एक जैसा है।
रूट ग्रामीण का, दौड़ रही हाईवे पर
जिले में दौड़ने वाली अधिकतर निजी बसों के पास ग्रामीण रूट का परमिट है, लेकिन उनको हाईवे पर दौड़ाया जा रहा है। कई बसें तो ऐसी हैं, जो अपने निर्धारित रूट पर चलती ही नहीं।
सरकार को लगा रहे राजस्व का चूना
नियम में तो ऐसा संभव नहीं है कि एक ही नम्बर से दो बसें चले। मैं कल ही इसका पता करवाता हूं। यदि एक ही मालिक जानबूझकर इस प्रकार अवैध रूप से बस चला रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
- देवेन्द्र अकोदिया, जिला परिवहन अधिकारी, नागौर
Published on:
23 May 2022 11:07 pm
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