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नाटक रूहों में कब्रिस्तान से आज़ादी पाने को परेशान दिखी ‘रूहें’

जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की पाक्षिक नाटक योजना के तहत रंगायन में उर्दू नाटक ‘रूहें’ ( Drama Roohen ) का शुक्रवार को मंचन हुआ। एस. एम. अजहर द्वारा लिखित एवं निर्देशित लिटिल थेस्पियन की इस पेशकश में एक राज्य की अस्थिरता के साथ ही उसके गौरव की कहानी प्रदर्शित की गई। ( jkk )

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जयपुर

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Abdul Bari

Dec 06, 2019

S.M. Zaheer s Drama Roohen Play In JKK : 'Roohen Drama'

S.M. Zaheer s Drama Roohen Play In JKK : 'Roohen Drama'

जयपुर
जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की पाक्षिक नाटक योजना के तहत रंगायन में उर्दू नाटक ‘रूहें’ ( Drama Roohen ) का शुक्रवार को मंचन हुआ। एस. एम. अजहर द्वारा लिखित एवं निर्देशित लिटिल थेस्पियन की इस पेशकश में एक राज्य की अस्थिरता के साथ ही उसके गौरव की कहानी प्रदर्शित की गई।

मौजूदा हालात से निपटने की कोशिश ( jkk )

नाटक के माध्यम से मानवीय भावनाओं और संघर्षों का कोलाज प्रस्तुत किया गया। नाटक के केंद्र में एक शाही कब्रिस्तान है। यहां लंबे समय से अनेक आत्माएं बाहर आने के लिए संघर्ष कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर वर्तमान पीढ़ी मौजूदा हालात से निपटने की कोशिश में संघर्षरत है क्योंकि ये जानते हैं कि नफरत से कभी भी खुशी हासिल नहीं हो सकती है।

विभिन्न रंगों को दर्शाया


नाटक में संघर्ष के विभिन्न रंगों को दर्शाया गया। नाटक में अतीत एवं वर्तमान, सही एवं गलत और अभिजात वर्ग एवं लोकतंत्र के बीच का संघर्ष को बारीकी से उकेरा गया है।


नाटक में निर्देशक ने स्वयं बड़े नवाब के रूह की भूमिका भी निभाई। कब्रिस्तान में छोटे नवाब एवं बड़े नवाब की रूह के बीच संवाद दिखाया गया। उसमें दोनों अपने-अपने नजरिए से इतिहास को सही सिद्ध करते नजर आए। इसी कब्रिस्तान का बूढ़ा चौकीदार इन सभी रूहों को कब्रिस्तान से बाहर जाने से रोकता है।

इन कलाकारों ने निभाई भूमिका

नाटक में एस. एम अजहर आलम ने जहां बडे नवाब की भूमिका में एक्टिंग की, वहीं सुवनकार शिट (नवाब ताहिर अली बेग), निहार चौधरी (नायब सिपाहसालार), अभिक महतो (फरहाद हुसैन), दिलीप भारती (जब्बार हुसैनी), मो. मारूफ एवं मो. आतिफ अंसारी (नवाब), उमा झुनझुनवाला (बेगम साहिबा), शबरीन खातून (नवाबजादी) के अतिरिक्त जैनुलबदीन, आरिफ आलम, प्रोणय साहा, मनोहर झा, तन्मय सिंह (रूह) के साथ ही नीलांजन चटर्जी, तारिक अली नैयर, अमर्त्या भट्टाचार्य ने भी अभिनय किया।

नाटक में संगीत प्रसिद्ध संगीतकार मुरारी राय चौधरी ने दिया, जबकि वस्त्र-विन्यास एवं मेकअप उमा झुनझुनवाला का रहा। एस.एम अजहर ने मंच सज्जा तथा प्रकाश संयोजन की व्यवस्था संभाली।

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