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इस खेती से हर साल आप कमा सकते हैं लाखों

Sahjan farming : अगर आपके पास सीमित जमीन है तो आप औषधीय पौधों के साथ ही कैश क्रॉप लगाकर कमाई कर सकते हैं।  

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इस खेती से आप कमा सकते हैं हर साल लाखों

इस खेती से आप कमा सकते हैं हर साल लाखों

जयपुर
Sahjan farming : अगर आपके पास सीमित जमीन है तो आप औषधीय पौधों के साथ ही कैश क्रॉप लगाकर कमाई कर सकते हैं। औषधीय पौधों की बाजार में लगातार मांग बढ़ने से जो किसान इन पौधों की खेती कर रहे हैं, वो तुलनात्मक रूप से बाकी किसानों से अधिक कमा रहे हैं। औषधीय पौधों की खेती में एक नाम आता है सहजन की खेती का। सहजन इसे अंग्रेजी में ड्रमस्टिक (Drumstick) कहा जाता है। सहजन का वैज्ञानि‍क नाम मोरिंगा ओलीफेरा है। खास बात यह है कि सहजन का बीज, पत्तियां, फली तीनों की ही बाजार में मांग बनी रहती है।

कुछ किसान सहजन की खेती करके सालाना 6 लाख रुपए तक कमाई कर रहे हैं यानि हर महीने करीब 50 हजार रुपए की आमदनी सिर्फ सहजन से हो रही है। सहजन की खेती में महत्वपूर्ण बात यह है कि इसकी खेती में बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती है। इसका रखरखाव भी कम करना पड़ता है। इसकी खेती करना आसान भी है। आप खेती से अपनी आमदनी बढ़ाना चाहें तो बाकी फसलों के साथ सहजन की खेती भी कर सकते हैं। परंपरागत फसलोंं के साथ इसकी खेती साथ में की जा सकती है।


इसलिए महत्वपूर्ण है सहजन
सहजन की मांग बाजार में इसलिए भी रहती है क्योंकि इसका हर हिस्सा औषधीय गुण रखने के साथ ही खाया जा सकता है। सहजन की पत्‍तियों को भी बतौर सलाद खाने में उपयोग लिया जा सकता है। इसके बीज, फली और फूल में औषधीय तत्व अच्छी मात्रा में होते हैं। इसके बीज से तेल निकाला जाता है। सहजन में औषधीय गुणों को देखते हुए यह दावा किया जाता है कि अगर इसका इस्तेमाल किया जाए तो करीब 300 से अधिक रोगों से बचा जा सकता है। सहजन में विटामिन, एंटी ऑक्सीडेंट, एमिनो एसिड और दर्द निरोधक तत्व पाए जाते हैं। आयुर्वेदिक दवाओं में इसका अच्छा इस्तेमाल किया जाता है।

कम पानी में अच्छी खेती
सहजन की खेती गर्म इलाकों में आसानी से की जा सकती है। सहजन की खेती में ज्यादा पानी की जरूरत भी नहीं पड़ती है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, यूपी, आंधप्रदेश, कर्नाटका, झारखंड समेत अन्य स्थानों पर इसकी खेती की जा रही है। सहजन गर्म इलाकों में आसानी से फल फूल जाती है क्योंकि इसको ज्‍यादा पानी की भी जरूरत नहीं होती। इसकी खेती में पहले साल के बाद साल में दो बार उत्‍पादन होता है। फिर सामान्यतया पर एक पेड़ 10 साल तक अच्‍छा उत्‍पादन करता है।