
पक्षी त्रासदी के बाद विश्व प्रसिद्ध खारे पानी की सांभर झील में सुदूर देशों से आने वाले विदेशी पावणों ने मुंह फेर लिया है। जिससे झील की रौनक फीकी पड़ गई है। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो त्रासदी के बाद से इनकी संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। गत वर्ष की तुलना में 50 फीसदी तक प्रवासी पक्षी कम आए हैं। ये चिंता का विषय बन गया है।
दरअसल, सांभर झील सितम्बर से मार्च तक मंगोलिया, दक्षिणी अफ्रीका, रूस, चाइना समेत कई देशों से हजारों किमी दूरी तय कर आने वाले प्रवासी पक्षियों से सरोबार रहती है। नवंबर 2019 में यहां हुई विश्व की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी से हालात बिगड़ गए। जिसमें एवियन बोटुलिज्म के कारण हजारों पक्षियों की मौत हो गई थी। इस त्रासदी के बाद से झील में आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में लगातार तीसरे वर्ष गिरावट दर्ज हुई है। इससे पक्षी प्रेमी मायूस है।
फ्लेमिंगो भी आधे ही दिख रहे
निजी स्वयंसेवी संस्था वाइल्ड लाइफ क्रीएचर ऑर्गेनाइजेशन फुलेरा के ओम प्रकाश सैन, मोहित शर्मा ने बताया कि रतन तालाब, झपोख डेम पर भी प्रवासी पक्षी बहुत कम दिख रहे हैं। फ्लेमिंगो भी गत वर्ष की तुलना में आधे ही नजर आ रहे हैं।
प्रजातियां दिख रही
वन विभाग के दूदू रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेंद्र खिंची के अनुसार यहां 250 से अधिक प्रजातियों के डेढ़ लाख से ज्यादा प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। गत वर्ष 150 प्रजातियों के एक लाख पक्षी देखे गए। इस बार 110 प्रजातियों के 50 हजार प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं। इनमें नोर्दन शाउलरर, रफ, कोमन कूट, ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट समेत कई प्रजातियां शामिल हैं। वास्तविक स्थिति जनवरी-फरवरी में होने वाली गणना में पता चल सकेगी।
50 में से 110
रोग निदान विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. ऐ.के कटारिया ने बताया कि पक्षियों की याददाश्त तेज होती है। उनमें कम्युनिकेशन भी अच्छा होता है। एक बार जिस जगह उन्हें व्यवधान होता है, उस जगह को वह कुछ समय के लिए छोड़ देते हैं। ये भी यहां पक्षी कम आने का कारण हो सकता है। ये हालात सुधरने में संभवत: 3-4 वर्ष में वे पूर्णरुप से झील को ठहरने के लिए अनुकूल समझेंगे। उनका कहना है कि इस दिशा में सरकार को गंभीरता बरतने की जरूरत है।
Published on:
28 Nov 2022 10:42 pm
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