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सम्मेद शिखर बचाने के लिए जयपुर में अनशन पर बैठे मुनि सुज्ञेय सागर ने त्यागे प्राण, एक और मुनि ने छोड़ा अन्न

सम्मेद शिखर तीर्थ रक्षा के लिए मुनि सुज्ञेय सागर का समाधिमरण, सांगानेर संघीजी मंदिर में आचार्य सुनील सागर के संघस्थ ने किया शरीर का त्याग, एक और मुनि ने किया अन्न का त्याग

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sammed shikharji

हर्षित जैन / जयपुर। झारखंड स्थित जैन तीर्थ सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल बनाए जाने के विरोध में देशभर में सकल जैन समाज आंदोलनरत है। उक्त प्रकरण में राजधानी में गत 10 दिनों से अनशन कर रहे 72 वर्षीय जैन मुनि सुज्ञेय सागर का मंगलवार सुबह 6 बजे सांगानेर स्थित संघीजी मंदिर में समाधिमरण हो गया। वे झारखंड सरकार के फैसले के खिलाफ आचार्य सुनील सागर के संघस्थ रहकर अनशन कर रहे थे।

सांगानेर संघीजी मंदिर कमेटी के महामंत्री सुरेश कासलीवाल ने बताया कि बैंड-बाजों के बीच उनकी डोल यात्रा जैन नसियां रोड अतिशय क्षेत्र वीरोदय नगर, सांगानेर पहुंची, जहां कि अंतिम क्रियाएं संपन्न हुईं। सैकड़ों की संख्या में युवाओं समेत अन्य समाजजन अंतिम यात्रा में शामिल हुए। इस मौके पर आचार्य सुनील सागर ससंघ व आचार्य शशांक सागर सहित बड़ी संख्या मेें समाजजन उपस्थित थे। वहीं, समाजजन ने केंद्र सरकार से इस प्रकरण में हस्तक्षेप के साथ ही संज्ञान लेने की मांग की।

एक और मुनि ने त्यागा अन्न

उधर, सांगानेर संघीजी मंदिर में आचार्य सुनील सागर के संघस्थ मुनि समर्थ सागर ने भी सम्मेद शिखर को तीर्थ क्षेत्र घोषित करने के मुहिम के समर्थन में अन्न त्याग दिया है। गृहस्थ जीवन में मूलत: उदयपुर के झल्लारा निवासी मुनि सुज्ञेय ने आचार्य सुनील सागर के सान्निध्य में मुंबई में ब्रह्मचर्य का व्रत लिया था और बांसवाड़ा में मुनि दीक्षा ली।

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