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संजय ने सजाया ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का गुलदस्ता

‘तराना-ए-गांधी’ एलबम से कराया पूरब पश्चिम का मिलनफ्रांस के प्यानो प्लेयर अरनौद रग्गी ने भी घोली मिठासजल्द रिलीज होगा क्रिएटिव वीडियो एलबम

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Apr 09, 2021

संजय ने सजाया ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का गुलदस्ता

संजय ने सजाया ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ का गुलदस्ता


जयपुर, 9 अप्रेल।
देसी हो या विदेशी संगीत या फिर हो नाटक, संजय ख़ान ने हर फील्ड पर अपनी धाक जमाई है। कभी वे डॉन जोंस के रूप में फ्रेंच ओपेरा कैरेमन की प्रमुख भूमिका निभाते हैं तो कभी फोक म्यूजिक की मिठास को अपने सुरीले कंठों में पिरोते हैं। साथ ही उन्हें खड़ताल का जादूगर भी कहा जाता है। जिसके चलते उन्हें फ्रांसीसी और इतालवी अवाम के बीच एक वर्सेटाइल कलाकार होने का सौभाग्य प्राप्त है। संजय ख़ान वैसे तो शास्त्रीय, सूफी और राजस्थानी संगीत में महारथ हासिल रखते हैं। मगर इन दिनों वे चर्चा में हैं अपने नए कंपोजिशन वैष्णव जन तो तेने कहिए तराना.ए.गांधी को लेकर, जिसे उन्होंने फ्रांस के प्यानो प्लेयर अरनौद रग्गी के साथ मिलकर तैयार किया है।
जल्द रिलीज होगा एलबम
संजय का कहना है एलबम का फिल्मांकन पेरिस की कई खूबसूरत लोकेशंस पर किया गया है जो जल्द रिलीज होगा। उन्होंने कहा कि गायिकी की विरासत उन्हें घुट्टी में ही मिली है। जिसके चलते वे आज भी इस विरासत को गंभीरतापूर्वक संभाल रहे हैं। फिलहाल होम टाउन आए हुए संजय अपनी स्पिरिचुअल कंपोजिशन वैष्णव जन तो तेने कहिए तराना ए गांधी का प्रमोशन कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह कंपोजिशन पूरब पश्चिम का मिलन होने के साथ.साथ मेरी और अरनौद रग्गी की दोस्ती की निशानी भी है, क्योंकि इसमें जहां मैंने इस चर्चित रचना वैष्णव जन तो तेने कहिए को गाया है वहीं प्यानो प्लेयर अरनौद रग्गी ने इसमें अपने प्यानो की मिठास को घोला है। उन्होंने कहा कि गांधीजी के सबसे प्रिय भजनों में से है वैष्णव जन तो तेने कहिए के रचयिता कवि नरसी मेहता हैं। महात्मा गांधी का यह भजन दुनियाभर में लोकप्रिय है।
बचपन से ली तालीम
संजय खान बताते हैं कि उन्होंने सात साल की उम्र में संगीत सीखना शुरू किया था। वह अपने संगीत के खानदानी परिवार की सातवीं पीढ़ी के युवा कलाकारों में से एक हैं। उन्हें संगीत की तालीम विरासत में मिली है। उनके पहले गुरु पिता उस्ताद रफीक मोहम्मद हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के नामवर कलाकार उस्ताद मुनीर खान साहब, उस्ताद इकराम ख़ान और उस्ताद अमीर खान साहब टोंक वालों से संगीत की तालीम लेकर अपनी गायिकी की शुरुआत की। संजय बताते हैं कि वह धोद नाम के बैंड के प्रमुख सिंगर हैं। उन्होंने सन 2009 में विदेश का पहला टूर किया। जहां से उनकी गायिकी को रफ्तार मिली। उन्होंने फ्रांसीसी रॉक सिंगर, गीतकार और गिटार वादक मैथ्यू चेडिड के साथ भी परफॉर्म किया है। उन्होंने जीन गोयोमार्च और इटली के मशहूर सिंगर म्यूजिकल ग्रुप एपरेला क्लासेस और यूएसए के लैप के साथ भी काम किया है। साथ ही फ्रांस और अमेरिका के नामचीन कलाकारों के साथ अपने सुरों को मिलाया है।

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