
Sardar Sarovar Dam : सरदार सरोवर बांध : जलस्तर 136 मीटर से ऊपर
सरदार सरोवर बांध : जलस्तर 136 मीटर से ऊपर, सैकड़ों गांवों के डूबने की खतरा
- सरदार सरोवर बांध 90 प्रतिशत से अधिक भरा
- जलस्तर 136 मीटर की रिकॉर्ड ऊंचाई से भी ऊपर
- जलस्तर रोज ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बना रहा
- जलस्तर का रिकॉर्ड दो साल बाद टूटा
- वर्ष 2017 में जलस्तर 130.75 मीटर ऊंचा
- नर्मदा जल विद्युत संयंत्र की सभी 6 इकाइयां फिर शंरू
- डूब क्षेत्र के सैकड़ों गांवों के डूब जाने की आशंका
- जल स्तर बढऩे से मध्य प्रदेश के 32 गांवों के डूबने का खतरा
- नर्मदा बचाओ आंदोलन की संयोजक मेधा पाटकर सक्रिय
- सरदार सरोवर बांध का जल स्तर घटाने की मांग
- जल स्तर घटाने की मांग को लेकर आंदोलन
- सरदार सरोवर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध
- यह नर्मदा नदी पर बना 138 मीटर ऊंचा बांध
- देश की सबसे बड़ी जल संसाधन परियोजना
- महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, गुजरात और राजस्थान को फायदा
- कुल संग्रह लगभग 90 प्रतिशत से अधिक हो गया है
- जलाशय से 167 शहरों और 10 हजार गांवों को जलापूर्ति
- जल विद्युत संयंत्र की लगी है 6 इकाइयां
- प्रत्येक जल विद्युत संयंत्र से 200 मेगावाट बिजली
मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा के कारण पानी की सतत भारी आवक के कारण मध्य गुजरात के केवडिय़ा में बने सरदार सरोवर बांध जलाशय का जलस्तर रोज ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बना रहा है। जलस्तर अब 136 मीटर का आंकड़ा भी पार कर गया है। इससे पहले गत दो सितंबर को पहली बार जलस्तर 135 मीटर पर 27 अगस्त को जलस्तर 134 मी पर और 20 अगस्त को 133 मी पर पहुंचा था। दो साल पहले 2017 में इस पर लगाए गए 30 दरवाजों को बंद किए जाने के बाद से इसका अधिकतम स्तर पूर्व के 121.92 मीटर से बढ़ कर 138.68 मीटर हो गया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की संयोजक मेधा पाटकर (medha patkar) का कहना है कि जलस्तर 133 मीटर के ऊपर जा चुका है। ऐसे में बगैर पुनर्वास डूब कराना अनुचित और असंवैधानिक है।
नर्मदा बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक 8 सितंबर दोपहर 12 बजे इसका जलस्तर 136.10 मीटर था। यह 7 सितंबर दोपहर 12 बजे पहली बार 136 मी पर पहुंचा था। पानी की आवक 376974 घन फुट प्रति सेकंड या क्यूसेक, जबकि जावक इससे कम 254890 क्यूसेक थी। 13 दरवाजों को एक मीटर 30 सेमी तक खोल दिया गया था। इस पर लगे दरवाजों को पहली बार गत 9 अगस्त को खोला गया था, जब जलस्तर 131.45 मीटर तक पहुंचा था। यह दरवाजे लगाए जाने से गुजरात की जीवनरेखा कहे जाने वाले इस जलाशय का उच्चतम जलस्तर 121.92 मीटर से बढ़ कर 138.68 मीटर हो गया था। इससे पहले के दो वर्ष में इसमें अधिकतम जलस्तर 130.75 मी. दर्ज किया गया था, जो 25 सितंबर 2017 को पहुंचा था। दो साल बाद नदी में स्थित जल विद्युत संयंत्र की सभी 6 इकाइयों ने फिर से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। प्रत्येक जल विद्युत संयंत्र से 200 मेगावाट बिजली बनती है। इसकी मुख्य नहर से जुड़ी जल विद्युत इकाई की पांच में से चार इकाइयां भी शुरू की गई है। इनमें प्रत्येक इकाई से प्रत्येक 50 मेगावाट बिजली मिलती है। इस जलाशय से 167 शहरों और 10 हजार से अधिक गांवों में रहने वाली राज्य की आधी से अधिक आबादी को जलापूर्ति की जाती है।
Published on:
08 Sept 2019 07:01 pm
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