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राजस्थान: अचानक Twitter Trend हुए BJP प्रदेश अध्यक्ष, यूज़र्स बोले- ‘सतीश पूनियां माफ़ी मांगो’, जानें क्या है मामला?

ट्विटर पर ट्रेंड हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, बीटीपी के नक्सलियों से रिश्ते को लेकर दिया है बयान, यूज़र्स नाराज़, ट्रेंड किया ‘# सतीश_पूनियां_माफी_मांगो’, बीटीपी को रोकने के लिए कांग्रेस-भाजपा ‘गठबंधन’ का मामला, डूंगरपुर जिला परिषद् बोर्ड बनाने के लिए भाजपा ने दिया था कांग्रेस का साथ  

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सतीश पूनिया माफ़ी मांगों ट्विटर पर किया ट्रेंड

सतीश पूनिया माफ़ी मांगों ट्विटर पर किया ट्रेंड

जयपुर।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया की उनके एक बयान को लेकर सोशल मीडिया पर खासा किरकिरी हो रही है। खासतौर पर ट्विटर प्लेटफ़ॉर्म पर उनके बयान को लेकर इतना ज़बरदस्त विरोध हुआ कि वे देश में ट्रेंड करने लग गए। मामला उनका उस विवादित बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने भारतीय ट्राइबल पार्टी यानी बीटीपी के नेताओं की नक्सलियों से रिश्ते होने की बात कही है।

'विवादों' में पूनिया का बयान!
पूनिया ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा कि डूंगरपुर के जिला नेताओं से हमें बीटीपी के नक्सली नेताओं से रिश्ते का पता चला था। यही वजह रही कि वहां मजबूरन कांग्रेस के साथ हाथ मिलाना पड़ गया। पूनिया के इस बयान को लेकर अब सोशल मीडिया पर यूज़र्स नाराजगी दिखा रहे हैं।

ट्रेंड किया ‘# सतीश_पूनियां_माफी_मांगो’
बीटीपी के नक्सलियों से रिश्ते होने का बयान सामने आते ही सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन्हें कटघरे में रखकर जमकर नाराजगी जताई। देखते ही देखते ये हैशटैग ट्विटर ऑल इंडिया ट्रेंडिंग में रहा।

नेता प्रतिपक्ष भी जता चुके चिंता
पूनिया से पहले नेता प्रतिपक्ष भी आदिवासी अंचलों में एक विचारधारा विशेष के लोगों द्वारा उपद्रव में शामिल होने को लेकर चिंता जता चुके हैं। कटारिया ने पिछले दिनों एक बयान में कहा था कि आदिवासी युवाओं को भड़काने वाले लोगों ने जिस तरह से भाषण दिए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्हे तलाश कर उन्हें गिरफ्तारी किया जाना चाहिए। कटारिया ने भी कहा था कि ऐसी जानकारी मिली है कि अन्य राज्यों से आने वाले लोग एक विशेष विचारधारा से जुड़े हैं जो युवाओं को बरगला रहे हैं।

खुफिया रिपोर्ट में भी मिले हैं संकेत
पूनिया का बयान भले ही विवादों में है पर राज्य सरकार कि पिछले दिनों आई एक खुफिया रिपोर्ट में प्रदेश के आदिवासी इलाकों में नक्सली विचारधारा से जुड़े युवाओं की सक्रियता होने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। सामने आया है कि डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ व उदयपुर जिलों के आदिवासी क्षेत्रों में युवाओं को नक्सली विचारधारा से जोड़ने की सुनियोजित कोशिशें चल रही हैं।

स्थानीय अधिकारियों ने भी माना है कि झारखंड और छत्तीसगढ़ से आए लोगों ने आदिवासी युवाओं को अपने साथ जोड़ने का काम शुरू किया है। इसके पीछे एक दलील ये भी दी जा रही है कि पिछले कुछ महीनों में इन क्षेत्रों में आदिवासी युवाओं ने उपद्रव भी किये हैं। उसके पीछे नक्सली गतिविधियों से जुड़े लोगों का हाथ होने की आशंका जताई गई है।

इन वजहों से बढ़ रही सक्रियता!
माना जा रहा है कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों में आदिवासियों से सम्बंधित कई मांगे पुरजोर तरीके से उठाये जाने के लिए युवाओं को एकजुट किया जा रहा है। इनमें प्रमुख मांगे संविधान की 5वीं अनुसूची के मुताबिक अधिकार देने, आदिवासी क्षेत्र में वन अधिकार मान्यता कानून लागू करने और टीएसपी एरिया की सरकारी नौकरियों में शत प्रतिशत आदिवासी युवाओं की भर्ती तय करना है।