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Saturn Retrograde 2020: शनि देव की वक्री चाल शुरू, राशियों पर यह पड़ेगा प्रभाव, देखें वीडियो

मई-जून में छह ग्रह होंगे वक्री, बनेगा दुर्लभ संयोग

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जयपुर

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Savita Vyas

May 11, 2020


जयपुर। न्याय के देवता शनिदेव आज यानि 11 मई से वक्री हो गए हैं। शनि करीब 142 दिन तक अपनी स्वराशि मकर में वक्री होकर उलटी चाल चलेंगे। 13 मई को शुक्र भी वृषभ राशि में वक्री हो जाएंगे ये दोनों ग्रह अपनी-अपनी राशि में वक्री रहेंगे। इसके बाद 14 मई को गुरु भी वक्री हो जाएगा। मई महीने में चार दिन में तीन ग्रह वक्री हो रहे हैं। वक्री होने का अर्थ यह है कि ये ग्रह अपनी स्वभाविक चाल के विपरीत चलेंगे यानी उलटी चाल में चलेंगे और यह तमाम राशियों पर अच्छा या बुरा प्रभाव डालेंगे।

ज्योतिषाचार्य डॉ रवि शर्मा के अनुसार, अगले कुछ दिनों में 9 में से 6 ग्रह एक साथ वक्री रहेंगे। तीन बड़े ग्रह शनि, गुरु और शुक्र के वक्री रहने के बाद कुछ दिन बाद बुध भी वक्री हो जाएगा। जबकि राहु-केतु हमेशा वक्री चाल में रहते हैं। इस तरह एक निश्चित समय के लिए 6 ग्रह एक साथ वक्री रहेंगे।
ें ये एक दुर्लभ संयोग बनेगा। ऐसा बहुत ही कम होता है, जब एक साथ 6 ग्रह वक्री रहते हैं। ग्रहों की इन स्थितियों के प्रभाव से दुनियाभर में फैली कोराना वायरस की महामारी का असर कम हो सकता है। अर्थव्यवस्था में भी सुधार होने के योग बन रहे हैं।

कौनसा ग्रह कितने दिन चलेगा उल्टी चाल
ज्योतिषाचार्य शलिनी सालेचा के अनुसार चार दिन में तीन ग्रह वक्री हो रहे हैं। शनि 11 मई 2020 को सुबह 9 बजकर 39 मिनट पर वक्री होंगे। वहीं शुक्र 13 मई को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से व बृहस्पति14 मई को रात्रि 8 बजकर 01 मिनट पर वक्री होंगे। शनि 142 दिन यानि 29 सितंबर तक उलटी चाल बरकरार रखेंगे जबकि गुरु 123 दिन यानि 13 सितम्बर तक वक्री रहेंगे। जबकि शुक्र 44 दिन तक वक्री रहेंगे। वहीं इसी साल 27 दिसंबर को शनि के अस्त होने से इनके प्रभाव कम होंगे।

ग्रहों के वक्री होने का प्रभाव

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश शास्त्री ने बताया कि बृहस्पति ग्रह की दो राशियां धनु और मीन है। बृहस्पति कर्क में उच्च व मकर में नीच अवस्था में होते हैं। यह जब वक्री होते हैं अर्थात उलटी चाल चलते हैं तो कर्क राशि के लिए लाभदायक रहेंगे। वहीं मकर राशि के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। वहीं अन्य राशियों पर इसका अलग-अलग असर रहेगा। वहीं शुक्र भी वक्री होंगे। इन दोनों ग्रहों का वक्री होने से अनिष्ट में कमी आनी शुरू हो जाएगी।

शनि का प्रभाव: शनि के वक्री होने से वृषभ, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि वालों के लिए संघर्ष का समय, वृश्चिक और कुंभ के लिए सामान्य, लेकिन मेष, मिथुन, कन्या, तुला और मकर राशि वाले निश्चिंत रहें। वैसे धनु और मकर राशि में पहले से ही शनि की साढ़े साती का प्रभाव चल रहा था। अब कुंभ राशि पर भी शनि की साढ़े साती का पहला चरण शुरु हो जाएगा। मकर और कुंभ शनि की दो राशियों में से शनि की दूसरी राशि कुंभ शनि की स्वराशि और मूल त्रिकोण राशि है। दो अन्य राशि मिथुन और तुला पर शनि की ढैय्या चल रही है।