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प्रेशर पॉलिटिक्सः एससी-एसटी समाज की महापंचायत 2 अप्रैल को जयपुर में, राजनीतिक भागीदारी पर महामंथन

-2 अप्रैल को जयपुर के मानसरोवर में होनी है महापंचायत, 2 अप्रैल 2018 को देश भर में अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों दर्ज मुकदमे वापस लेने सहित कई मुद्दों पर होगी चर्चा

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जयपुर। प्रदेश में 9 महीने के बाद होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर जहां राजनीतिक दल चुनावी तैयारियों में व्यस्त हैं तो वहीं विभिन्न समाज भी विधानसभा चुनावों में राजनीतिक दलों पर दबाव बनाने के लिए अपने अपने समाजों को एक मंच पर इकट्ठा करके राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की बात कर रहे हैं।

पूर्व में जहां राजपूत समाज की ओर से महापंचायत की गई थी, इसके अलावा जाट समाज और ब्राह्मण समाज की ओर से भी महापंचायक करने के बाद अब अब एससी-एसटी वर्ग भी महापंचायत के जरिए राजनीतिक दलों से भागीदारी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर एससी-एसटी वर्ग की ओर से 2 अप्रैल को राजधानी जयपुर के मानसरोवर में महा पंचायत होनी है जिसमें एससी-एसटी वर्ग से जुड़े लोग शामिल होंगे।

महापंचायत को लेकर प्रदेश भर में तैयारियां जोरों पर
एससी-एसटी वर्ग की महापंचायत को लेकर प्रदेश के सभी जिलों में तैयारियां जोरों पर हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से एससी-एसटी वर्ग के लोग बड़ी संख्या में महापंचायत में शामिल होंगे। चर्चा यह भी है कि बीजेपी कांग्रेस सहित अन्य दलों में एससी-एसटी वर्ग से जुड़े प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधि भी इस महापंचायत में शामिल होंगे।

एससी-एसटी राजस्थान में बड़ा वोट बैंक
दरअसल एससी-एसटी राजस्थान में बड़ा वोट बैंक माना जाता है। एससी-एसटी वर्ग से जुड़े कई नेता भी यह बात कई बार कह चुके हैं कि संख्या बल के हिसाब से सरकार और राजनीतिक दलों में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वहीं प्रदेश में करीब 60 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं जहां पर एससी- एसटी वर्ग निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में बीजेपी-कांग्रेस सहित अन्य दल एससी- एसटी वर्ग को लुभाने की कवायद में जुटे रहते हैं।

महापंचायत में ये होंगी प्रमुख मांगें
बताया जाता है कि एससी-एसटी वर्ग की होने वाली महापंचायत में कई प्रमुख मांगे भी जोर शोर से रखी जाएगी। जिनमें 2 अप्रैल 2018 को देशभर में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, सरकारी नौकरी में पदोन्नति में आरक्षण बढ़ाने, एससी-एसटी वर्ग की जमीनों से कब्ज हटाने और राजनीति में एससी-एसटी समाज को प्रतिनिधित्व करने सहित कई ज्वलंत मुद्दे शामिल हैं।

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