
World Schizophrenia Day
जयपुर. आमतौर पर डर और वहम को मानसिक विकार नहीं माना जाता, लेकिन हर दस में से एक व्यक्ति में रहने वाली यह समस्या भी एक बीमारी है। जिसे स्किजोफ्रेनिया कहा जाता है।
एक अध्ययन के अनुसार इस बीमारी के शिकार 36 प्रतिशत लोगों में असामान्य व्यवहार, 34 प्रतिशत में बात-बात पर उतावला हो जाने और 30 प्रतिशत में अप्रासंगिक बाते करने की समस्याएं सामने आए। ऐसे लोगों को हर समय इस बार का भी डर और वहम रहता है कि कहीं कुछ बुरा ना हा जाए, कहीं उनके खिलाफ कोई साजिश तो नहीं हो रही।
19 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 500 मरीजों पर किए गए इस अध्ययन में सामने आया कि मात्र 16 प्रतिशत मरीज ही लक्षण सामने आने पर सीधे मनोरोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे। शेष 68 प्रतिशत मरीज बीमारी होने के 3 से 8 महीनों तक तंत्र विद्या और पूजा पाठ पर ही निर्भर रहे। बीमारी बढ़ने के बाद उन्होंने चिकित्सक की सलाह ली।
मस्तिष्क की असामान्य रचना, पारिवारिक समस्याएं, तनावपूर्ण जीवन, बचपन से क्षतिपूर्ण विकास और गर्भावस्था के दौरान तकलीफें इसके मुख्य कारणों में शामिल है।
यह हैं लक्षण
विचार, अनुभूति और व्यवहार पर गंभीर असर पड़ता है
मरीज वास्तविक और काल्पनिक अनुभवों में फर्क नहीं कर पाता
काल्पनिक विचारों की आतंरिक जिंदगी जीता है
बाहरी दुनिया से अलग-अलग रहने लगता है
स्किजोफ्रेनिया आनुवांशिक भी होता है
Published on:
23 May 2023 09:15 pm
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