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स्क्रब टाइफस में घटती प्लेटलेट्स, दिमाग पर भी असर

स्क्रब टाइफस में बुखार होने पर बचाव के लिए कोई दवा या टीका नहीं है। शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढककर रखें।

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स्क्रब टाइफस एक जीवाणुजनित संक्रमण है। इसकी वजह से प्लेटलेट्स कम होने लगती हैं। समस्या बढऩे से इसका असर लिवर, किडनी और बे्रन पर भी पड़ता है।

काली पड़ जाती है त्वचा
यह बीमारी आमतौर पर पहाड़ी इलाकों, जंगलों, खेतों और पशुओं पर पाए जाने वाले पिस्सुओं से फैलती है। पिस्सू के काटने पर उसकी लार में मौजूद खतरनाक जीवाणु रिक्टशिया सुसुगामुशी खून से शरीर में फैल जाता है। यह प्लेटलेट्स को तेजी से कम करता है। साथ ही सांस लेने में परेशानी, पीलिया, उल्टी, जी मिचलाना, जोड़ों में दर्द और तेज बुखार आता है। शरीर पर काले चकत्तेे एवं फफोले भी पड़ जाते हैं। रोग के सही समय पर उपचार से गंभीर लक्षणों से बचा जा सकता है।

शरीर ढककर रखें
स्क्रब टाइफस में बुखार होने पर बचाव के लिए कोई दवा या टीका नहीं है। शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढककर रखें। परमेथ्रिन एवं बेंजिल बेंजोलेट का छिडक़ाव किया जाना चाहिए।

गंभीर होने पर निमोनिया की आशंका
कीट के काटने के पहले हफ्ते में व्यक्ति को बुखार आता है। साथ ही सिर में दर्द, खांसी, मांसपेशियों में दर्द एवं शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। समय पर इलाज न होने से यह निमोनिया का रूप भी ले सकता है। यहां तक की लिवर, किडनी और ब्रेन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

डॉ. हेमन्त माहुर
फिजिशियन, आरएनटी मेडिकल कॉलेज, उदयपुर