
जयपुर. जैसी नींव होती है, उसी तरह की इमारत खड़ी होती है। कर्पूर चंद्र कुलिश जी ने जिन सिद्धांतों की नींव रखी, उसकी झलक और भाषा शैली राजस्थान पत्रिका की खबरों में दिखती है। यह बात बुधवार को राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चंद्र कुलिश जी की जयंती के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के लाइफ लॉन्ग लर्निंग विभाग में आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने कही। वक्ताओें ने कहा कि युवा अखबार को अपने जीवन से जोड़ें। अखबार समाज की दिशा को दर्शाता और दिखलाता है। यह सेमिनार राजस्थान पत्रिका की ओर से लाइफ लॉन्ग लर्निंग विभाग के सहयोग से आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलपति अल्पना कटेजा, लाइफ लॉन्ग लर्निंग विभाग के निदेशक प्रो.प्रकाश शर्मा, राजस्थान कॉलेज के प्राचार्य प्रो. विनोद शर्मा, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र सिंह शेखावत ने सेमिनार को संबोधित किया। इस अवसर पर छात्रों को कुलिश जी की जीवन यात्रा से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
सेमिनार में प्रो. अरविंद विक्रम, कॉमर्स कॉलेज प्राचार्य प्रो. भवानीशंकर, जनसंचार विभाग विभागाध्यक्ष प्रो.उर्वशी शर्मा, प्रो. अशोक अग्रवाल, प्रो. तारावती मीणा, प्रो. अंशु वर्मा मौजूद रहे। सेवानिवृत्त कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद मुस्तफा, कर्मचारी नेता गोविंद सिंह, छात्र नेता शुभम रेवाड़ सहित स्टूडेंट्स मौजूद रहे।
वक्ताओं ने कहा कि राजस्थान पत्रिका ने सरकार के समक्ष न सिर्फ मुद्दों को रखा है बल्कि उनका समाधान भी करवाया है। उन्होंने कहा कि लोगों का राजस्थान पत्रिका से एक भावनात्मक लगाव है। इस मौके पर वक्ताओं ने कुलिश जी की जीवन यात्रा और राजस्थान पत्रिका के योगदान के बारे में छात्रों को बताया।
Published on:
21 Mar 2024 03:44 pm
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