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58 साल बाद चतुर्ग्रही योग में शनिश्चरी अमावस्या, जानिए क्या पड़ेगा 12 राशियों पर प्रभाव

Shani Amavasya 2023: भरणी-कृतिका नक्षत्र, शोभन योग में ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या शुक्रवार को वट पूजन-शनिश्चरी अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। इस मौके पर शनि जयंती का संयोग रहने से शनिदेव की आराधना के साथ ही महिलाएं व्रत रखकर पूजा अर्चना करेगी।

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Shani Amavasya 2023

Shani Amavasya 2023: भरणी-कृतिका नक्षत्र, शोभन योग में ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या शुक्रवार को वट पूजन-शनिश्चरी अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। इस मौके पर शनि जयंती का संयोग रहने से शनिदेव की आराधना के साथ ही महिलाएं व्रत रखकर पूजा अर्चना करेगी। ज्योतिषविदों के मुताबिक वट वृक्ष हानिकारक गैसों को नष्ट कर वातावरण की शुद्धि में मददगार है।

ज्योतिषाचार्य पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि वट वृक्ष (बड़ वृक्ष) दीर्घायु, अक्षय सौभाग्य, निरंतर, भाग्योदय की आराधना के लिए खास है। बुजुर्ग महिलाओं के साथ नवविवाहिताएं सुहाग की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर परिक्रमा करती है। वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, बीच में भगवान विष्णु और ऊपरी भाग में भोलेनाथ का वास होता है।

इसलिए है खास

शास्त्रानुसार इस दिन वट सावित्री व्रत करने से पति की दीघार्यु के साथ ही संतान की सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है। महिलाएं वट की पूजा के साथ जल अर्पित करने के साथ ही परिक्रमा करने के साथ 108 बार चारों ओर बंधन बनाकर अर्चना करती है। शास्त्रानुसार वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने व्रत से मृत पति को पुन: जीवित कराया था। तब से यह वटसावित्री व्रत के नाम से भी जाना जाता है।
पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि ग्रहों के न्यायाधिपति शनि जयंती के पर्व पर कल मेष राशि में चार ग्रह यानि चंद्र, बुध, गुरु और राहु विराजमान रहेंगे। साथ ही मंगल-शनि का षड़ाष्टक योग रहेगा। लगभग 58 साल यह संयोग रहेगा। शनिश्चरी अमावस्या पर साढ़ेसाती, ढैय्या से मुक्ति के लिए जातक विभिन्न उपाय करेंगे। वर्तमान समय में मकर, कुंभ और मीन को साढ़ेसाती और कर्क, वृश्चिक राशि के जातकों की ढैय्या चल रही है।

पूजन व कथा सुनने का समय

सुबह 5.41 से 10.30 बजे तक

दोपहर 12 से चार बजे तक

इनका करें दान
ज्योतिषाचार्य पं. पुरुषोत्तम गौड़ ने बताया कि वर्तमान समय में शनिदेव स्वराशि कुंभ में चल रहे हैं। शनि मंत्र प्रां प्रीं प्रौं सं शनैश्चराय नम: या ऊं शं शनैश्चराय नम: का जाप करते हुए पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करें। जरूरतमंद लोगों को अनाज, धन, कपड़े, जूते-चप्पल, छाते का दान करें। किसी प्याऊ में मटके का दान भी कर सकते हैं। काली चीजों और तेल का दान करने के साथ शनि मंदिरों में शनिदेव का तेलाभिषेक करना फायेदमंद रहेगा।

राशि अनुसार करें उपाय

मेष- सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करें।

वृषभ- शनि देव के नामों का जप करें।

मिथुन- शनि देव को काली उड़द चढ़ाएं।

कर्क- राजा दशरथ द्वारा रचित शनि स्त्रोत्र का पाठ करें।

सिंह- सिंदूर और चमेली के तेल से हनुमान जी को चोला चढ़ाएं

कन्या- उपवास रखें और शनि देव के मंत्रों का जप करें

तुला- शनि देव का अभिषेक सरसों के तेल से करें

वृश्चिक- हनुमान चालीसा का पाठ करें और चींटियों को चीनी और आटा डालें

धनु- पीपल के नीचे दीपक जलाएं

मकर- शनि देव के मंत्रों का जप करें

कुंभ- हनुमान जी की उपासना करें और नीलम रत्न धारण करें

मीन- बजरंग बाण का पाठ करें और गरीबों की मदद करें

(ज्योतिषाचार्य पं.पुरुषोत्तम गौड़ के मुताबिक)