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शरद पूर्णिमा पर चांद की रोशनी में क्यों रखी जाती हैं खीर… क्या मान्यता, सेहत के लिए कैसे लाभदायक

शरद पूर्णिमा आज मंदिरों में सजेगी धवल झांकी, चंद्रमा की रोशनी में रखी जाएगी औषधीय खीर, अस्थमा रोगियों के लिए खीर एक औषधि के समान

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sharad purnima kheer

सर्वार्थसिद्धि, रवियोग, राजयोग, ध्रुवयोग सहित अन्य विशेष योग संयोगों में आश्विन शुक्ल पूर्णिमा बुधवार को शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी संपूर्ण सोलह कलाओं से धरती पर अमृत वर्षा करेगा। ठाकुरजी को चांदी के पात्र में खीर का भोग लगाया जाएगा। चंद्रमा की रोशनी में औषधीय खीर रखी जाएगी। मंदिरों में भी शरदोत्सव के तहत भगवान के समक्ष खीर का भोग लगाकर वितरण किया जाएगा। मंदिरों में श्वेत आभा बिखरेगी। ठाकुर जी को धवल पोशाक धारण कराकर सफेद पुष्पों से श्रृंगार किया जाएगा। धवल चांदनी में मंदिरों में छह हजार से अधिक किलो दूध की खीर का भोग लगाया जाएगा। अस्थमा रोगियों के लिए यह खीर एक औषधि के समान है। विभिन्न संस्थाओं की ओर से भी कार्यक्रम होंगे।

बढ़ती रोग प्रतिरोधक क्षमता

ज्योतिषाचार्य पं.पुरूषोत्तम गौड़ ने बताया कि चंद्रमा की रोशनी औषधीय गुणों से भरपूर रहती हैं। इसमें खीर पकाने की परंपरा है, जिससे खीर में औषधीय गुण आते हैं। खीर की मिठास से हमें ग्लूकोज मिलता है, जिससे तुरंत एनर्जी मिलती है। चांदी के बर्तन में रोग-प्रतिरोधक बढ़ाने की क्षमता होती है, इससे विषाणु दूर रहते हैं। गाय के दूध से बनी खीर का सेवन करना बहुत लाभदायक है। क्योंकि खीर में दूध, चीनी और चावल के कारक चंद्रमा है। ऐसी खीर खाने से चंद्रमा का दोष दूर होता है।

इसलिए भी महत्व

ज्योतिषाचार्य पं.सुधाकर पुरोहित और आचार्य हिमानी शास्त्री के मुताबिक शरद पूर्णिमा को महारास की रात भी कहते हैं। किवंदति है कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने इस रात में गोपियों के साथ महारास किया था। इस तिथि को कोजागरी पूर्णिमा, जागरी पूर्णिमा और कौमुदी व्रत भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरुड़ पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यह वर्ष की 12 पूर्णिमा तिथियों में सबसे विशेष मानी जाती है। शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है, जिसे अमृत काल भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है।

गोविंददेवजी मंदिर में विशेष झांकी

गोविंददेवजी मंदिर में शरद पूर्णिमा महोत्सव पर सुबह ठाकुर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। ठाकुर जी को शरद पूर्णिमा की सुनहरे गोटे की सफेद पार्चा जामा पोशाक धारण कराकर विशेष अलंकार श्रृंगार एवं मुकुट धारण कराया जाएगा। विशेष संध्या झांकी में शाम 7.15 से 7.30 बजे तक विशेष खाट सजाई जाएगी।

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