
Sharadiya Navratri
जयपुर. जगत जननी मां दुर्गा की आराधना के लिए नवरात्र को सर्वोत्तम समय माना जाता हैं। हिन्दू कलैंडर के अनुसार साल में चार बार नवरात्र आते हैं। चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ। इनमें से माघ और आषाढ़ में आने वाले नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। चैत्र नवरात्र को वासंतीय और अश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र के रूप में मनाया जाता है। वैसे तो सभी नवरात्र का अपना-अपना महत्व है, लेकिन उनमें भी मां दुर्गा की आराधना के लिए शारदीय नवरात्र को अधिक महत्व दिया गया है। देश में ही नहीं विदेशों में रहने वाले भारतीय भी इस व्रत को श्रद्धा के साथ रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम ने भी शारदीय नवरात्र में नौ दिन तक देवी को प्रसन्न कर विजयदशमी के दिन रावण का संहार किया था। शारदीय नवरात्र इस साल 3 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं। इस बार नवरात्र पूरे नौ दिन के है। वहीं नवरात्र का समापन 12 अक्टूबर को विजयादशमी पर होगा। वार के अनुसार इस बार मां दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन ‘डोली’ (पालकी ) पर और प्रस्थान चरणायुध (मुर्गे) पर हो रहा है। शास्त्रानुसार इस बार आगमन और प्रस्थान दोनों सुखद नहीं हैं। इससे मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अराजकता जैसी स्थिति रह सकती है। अतः सावधान रहते हुए मां दुर्गा की पूजा-भक्ति करनी है।
नवरात्र प्रारंभ होने के पूर्व लोगों के दिलों में यह जिज्ञासा बनीं रहती हैं कि मां दुर्गा अपना पूरा परिवार किस वाहन पर सवार होकर आएगी ओर किस वाहन से लौटेंगी। मां दुर्गा के आगमन एवं प्रस्थान से ही आगामी वर्ष के अच्छे बुरे फल का अंदाज लगाया जा सकता हैं। श्री शिव शक्ति योग पीठ नवगछिया के पीठाधीश्वर परमहंस स्वामी आगमानंद महाराज के अनुसार इस वर्ष नवरात्र कलश स्थापना अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 3 अक्टूबर गुरुवार को होने के कारण देवी महापुराण के अनुसार पृथ्वी पर मां दुर्गा का आगमन ‘डोली’ पर हो रहा हैं। जिसका फल होता हैं महामारी एवं अन्य कारणों से अधिकाधिक मृत्यु होगी। इससे मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अराजकता जैसी स्थिति रह सकती है। विजयादशमी 12 अक्टूबर शनिवार को हैं। ऐसे में मां दुर्गा पृथ्वी पर अपने पूरे परिवार के साथ ‘मुर्गा’(चरणायुध) पर सवार होकर लौटेगी। इसके कारण जनमानस में विकलता बनी रहेगी। लोगो के बीच द्वेषता बढ़ेगी। प्रस्थान शुभ संकेत नहीं है। गृह युद्ध या पड़ौसी देश से युद्ध की सी स्थिति बनेगी।
ज्योतिषाचार्य पं. सुरेश शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में मां का आगमन व प्रस्थान की सवारी वार से जुड़ी हुई है। यदि नवरात्र रविवार या सोमवार से शुरू होते हैं तो मां दुर्गा हाथी पर, शनिवार या मंगलवार को घोड़ा पर, गुरुवार या शुक्रवार को डोला पर, और बुधवार को शुरू होने पर मां दुर्गा नौका पर सवार होकर आती हैं।
फल: मां का गज ( हाथी) पर आना पानी की बढ़ोतरी, घोड़ा पर आना युद्ध की आशंका, नौका पर आने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। डोली पर आने से आक्रांत रोग और मृत्यु का भय बना रहता हैं।
पं. अविनाश मिश्रा के अनुसार यदि रविवार व सोमवार को विजयादशमी होती हैं तो मां दुर्गा भैंसा पर, शनिवार व मंगलवार को मुर्गा पर, बुधवार व शुक्रवार को गज पर एवं गुरुवार को नर वाहन पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं।
भैंसा पर प्रस्थान करना शोक का माहौल मुर्गा पर जन मानस में विकलता, गज पर शुभ वृष्टि, नरवाहन पर शुभ सौख्य होती हैं।
3 अक्टूबर से शुरू होने वाले शारदीय नवरात्र में नौ दिन तक हर दिन अलग-अलग नौ देवियों की आराधना की जाएगी और नैवेद्य अर्पित किए जाएंगे।
कब किस देवी की पूजा
3 अक्टूबर प्रतिपदा - मां शैलपुत्री
4 अक्टूबर द्वितीया मां ब्रह्मचारिणी
5 अक्टूबर तृतीया- मां चंद्रघंटा
6 अक्टूबर चतुर्थी- मां कुष्मांडा
7 अक्टूबर पंचमी- मां स्कंदमाता
8 अक्टूबर षष्ठी- माता कात्यायनी
9 अक्टूबर सप्तमी- मां कालरात्रि
10 अक्टूबर दुर्गा अष्टमी- महागौरी
11 अक्टूबर महानवमी- सिद्धिदात्री
12 अक्टूबर दशमी- दुर्गा विसर्जन और विजयादशमी (दशहरा)
Published on:
20 Sept 2024 02:24 pm
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