26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Navratri 2018: शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर से, इस बार 5 रवि योग व एक सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग

Navratri 2018- अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 10 अक्टूबर से इस बार शारदीय नवरात्रों की शुरुआत होगी। 18 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्रों के दौरान भक्त मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा व मां कुष्मांडा सहित दुर्गा माता के अलग-अलग नौ रूपों की आराधना करेंगे।

less than 1 minute read
Google source verification
Navratri 2018

Navratri 2018 : 10 से नवदुर्गा महोत्सव शुरू, उससे पहले जरूर पढ़ें यह खबर

जयपुर। Navratri 2018- अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर 10 अक्टूबर से इस बार शारदीय नवरात्रों की शुरुआत होगी। 18 अक्टूबर तक चलने वाले नवरात्रों के दौरान भक्त मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा व मां कुष्मांडा सहित दुर्गा माता के अलग-अलग नौ रूपों की आराधना करेंगे।

वहीं, घट स्थापना व महाअष्टमी (17 अक्टूबर) भी बुधवार को पड़ेगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक पहले नवरात्र पर सुबह 7:26 बजे यानि उदयव्यापिनी होने से इस दिन घट स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा। साथ ही इस बार नवरात्रों में द्विस्वभाव लग्न में घट स्थापना होगी।

घट स्थापना वाले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग दोनों संयोग शुभ नहीं है। सुबह 11.01 बजे तक यह योग रहेगा। इसके दो चरण निकलने के बाद घटस्थापना के लिए यह दोष स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। पहले दिन द्वितीया तिथि का क्षय होगा, लेकिन षष्ठी तिथि दो दिन होने से नवरात्रा पूरे नौ दिन के होंगे। इन दिनों में पांच रवि योग (12, 13,14, 15 व 18 अक्टूबर) और सर्वार्थ सिद्धि योग (14 अक्टूबर) का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो कि पूजा अर्चना, शुभ कार्यों के लिए बेहतर होगा।

कलश स्थापना मुहूर्त
पं. दामोदर प्रसाद शर्मा ने बताया कि बुधवार को अभिजीत मुहूूर्त में घट स्थापना नहीं करनी चाहिए। देवीपुराण के अनुसार सुबह देवी का आह्वान, स्थापना और पूजा शास्त्रानुसार होती है, लेकिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग को निषेध माना गया है। हालांकि इसके दो चरणों को त्यागकर घट स्थापना की जा सकती है। सुबह 11 बजकर 1 मिनट तक चित्रा और वैधृति योग 11.58 तक है। अत: नवरात्रा स्थापना बुधवार सुबह 6.27 से 7.01 बजे तक द्विस्वभाव कन्या लग्न में शुभ है।