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बहु- बेटियों के लिए छत्तीसगढ़ के 164 गांव हैं आदर्श, जहां दहेज की मांग करना है अपराध

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के 164 गांव ऐसे हैं जो बहुत बेटियों के लिए आदर्श गांव हैं। यहां बहुओं को दहेज के लिए प्रताड़ित नहीं किया जाता

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जयपुर

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Deepshikha

Mar 31, 2020

dowery case

आकांक्षा सिंह ने ससुराल वालों के खिलाफ दहेज में स्विफ्ट डिजायर कार की मांग को लेकर मारने पीटने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है

छिंदवाड़ा. समाज से दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए तमाम सामाजिक और प्रशासनिक प्रयास हो रहे हैं इसके बावजूद आए दिन दहेज प्रताडऩा के मामले सामने आते ही है। कुछ मामलों में महिलाएं इतनी प्रताडि़त हो जाती है, कि वे खुदकुशी जैसा कदम भी उठाती हैं। तो कहीं बहुओं को जलाकर या मारपीट कर उनकी जान तक ले ली जाती है। ऐसे में मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के 164 गांव ऐसे हैं जो बहुत बेटियों के लिए आदर्श गांव हैं। यहां बहुओं को दहेज के लिए प्रताड़ित नहीं किया जाता। इतना ही नहीं यहां महिला अपराधों की भी संख्या बहुत कम है।

बने दूसरों के लिए बने प्रेरणा


इन गांव के वासी खुद ही दहेज प्रताड़ना के प्रति इतने जागरुक हैं, कि ये देश के अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं। यहां के पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यहां अपराध तो दूर की बात यहां लोग इस तरह के अपराध की शिकायत भी लेकर नहीं आते।

यहां दहेज की मांग करना अपराध

माहुलझिर थाना की सीमा में 164 आदिवासी गांव है। अधिकांश परिवार मजदूरी कर भरण पोषण करते हैं। उंगलियों पर गिने जाने वाले थोड़े सम्पन्न है। इन लोगों की सबसे बड़ी जरूरत पेट पालना है, लेकिन फिर भी ये लोग बहू और बेटियों को दहेज के लिए प्रताडि़त नहीं होने देते। शिक्षा का स्तर भी बहुत अधिक नहीं है, लेकिन फिर भी इतनी समझ है कि दहेज की मांग करना अपराध है। मानवीयता भी नहीं है कि चंद रुपयों, कुछ सामग्री के लिए महिला को प्रताडि़त किया जाए। सबसे खास बात यह भी है कि इन गांव से महिलाओं से सम्बंधित अपराध भी बहुत कम ही सामने आते हैं। यहां रहने वालों से उन लोगों को सीख लेनी चाहिए जो बहू को दहेज के लिए प्रताडि़त करते हैं और इस हद तक करते हैं कि वे जान देने के लिए मजबूर हो जाती है।

चार साल में सिर्फ एक अपराध


माहुलझिर थाना क्षेत्र के बम्हानिया, चावलपानी, माहुलझिर, जमुनिया, अनहोनी और मानेगांव सहित 164 गांव शामिल है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार साल 2016, 2017 में एक भी दहेज प्रताडऩा का अपराध दर्ज नहीं हुआ था। माहुलझिर थाना के प्रभारी टीआइ भूपेन्द्र कुमार दीवान ने बताया कि साल 2018 में एक प्रकरण दर्ज हुआ है, जबकि साल 2019 और 2020 में अभी तक एक भी दहेज प्रताडऩा का अपराध पंजीबद्ध नहीं हुआ है।