
जयपुर. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ नारा आज पूरे देश में पहचान बना चुका है। यही नहीं इसे केंद्र सरकार कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए इसे बहुत बड़ा अभियान बन चुकी है। लेकिन इस नारे का रचियता कौन है, इसका जवाब न तो राज्य सरकार के पास है और न ही केंद्र सरकार के पास। क्योंकि प्रशासन इस नारे की रचियता जैसलमेर निवासी चेतना भाटी को श्रेय देना भूल गई।
इसके लिए चेतना ने 2016 में केंद्र सरकार को पत्र लिखा। लेकिन फिर भी नारे का श्रेय उन्हें नहीं मिला। आखिर लम्बी लड़ाई के बाद उन्हें उनका हक मिलेगा। जनवरी माह में पीएमओ की ओर से उन्हें श्रेय देने के लिए महिला एवं बाल विकास को लिखा है। चेतना भाटी फिलहाल उदयपुर में पुलिस महिला अनुसंधान प्रकोष्ठ अधिकारी पद पर कार्यरत हैं।
चेतना का दावा उनकी कविता के हैं अंश
जैसलमेर के धोरों में पल-बढ़ कर पुलिस सेवा में आई चेतना भाटी ने अपने गांव की बेटियों को आगे बढ़ाने व पढ़ाने के लिए खूब जी-तोड़ मेहनत की। उन्होंने कविताओं और लेखन के जरिए कन्या भ्रूण रोकने के लिए लोगों को जागरुक किया। उनका दावा है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं लाइन उनके द्वारा कन्या भ्रूण हत्या को लेकर लिखी गई एक कविता के अंश हैं।
ऐसे चली लड़ाई
भाटी का कहना है कि जैसलमेर में कन्या भ्रूण हत्या रोक, बेटियां बचाने के लिए उन्होंने कविताएं लिखकर पोस्टर बनाए थे। अगस्त 2012 में नागौर पुलिस लाइन में निरीक्षक थी, तब इस पोस्टर को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को भेजा था और पोस्टर विमोचन का निवेदन किया था।
इस पर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ लिखा गया था। तब तत्कालीन सरकार से कोई जवाब नहीं मिला था।
केंद्र ने बना दी योजना
पहले सरकार ने चेतना की कविता के अंश बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं का नारा देकर कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लड़कियों की शिक्षा के लिए पूरे देश में प्रसारित किया। फिर जनवरी 2015 में प्रधानमंत्री और केन्द्र सरकार की ओर से इसे राष्ट्रीय फ्लेगशिप योजना में शामिल किया गया।
पीएमओ को लिखा खत
केंद्र सरकार की ओर से 2015 में पानीपत हरियाणा से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना शुरु की गई। 2016 में चेतना ने इस नारे के रचियता के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी को पत्र लिखकर सूचना चाही। सभी ने योजना के बारे में जानकारी दे दी लेकिन रचियता के बारे में किसी ने नहीं बताया। तब भाटी ने इस नारे को रचने का दावा किया। इसक अलावा चेतना ने महिला एवं बाल विकास सहित संबंधित विभागों और मंत्रालयों को पत्र लिख नारे का श्रेय देने के लिए लिखा।
आखिर जीत ली लड़ाई
2016 से अपने हक के लिए लड़ रही लड़ाई में आखिर चेतना को जीत मिल ही गई। जब सारे विभागों ने उन्हें कोई जबाव नहीं दिया और पीएमओं में आरटीआई लगाई तो उनके इस मामले पर प्रशासन हरकत में आया। पीएमओं की ओर से जनवरी 2020 में महिला एवं बालविकास विभाग को पत्र लिख चेतना को इस नारे के लेखन का श्रेय देने के लिए कहा गया।
चेतना भाटी का कहना है कि मुझे पद, पैसा व प्रमोशन नहीं चाहिए। यह सम्मान किसी को भी मिले, मेरे राज्य का नाम होना चाहिए।
Published on:
23 Mar 2020 08:09 pm
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