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She News- छोड़ी सरकारी नौकरी, किया संघर्ष ,बेटे को बनाया रोल मॉडल

एक मां ही होती है जो अपने बच्चों के लिए हद से गुजर जाती है। अपने बच्चों के लिए वह कुछ भी कर सकती है। ऐसी ही एक मां हैं प्रतिभा भटनागर। मनोवैज्ञानिक सलाहकार और विशेष शिक्षक प्रतिभा ने कड़ी मेहनत और संघर्ष से अपने स्पेशल चाइल्ड की परवरिश इस तरह की कि उन्हें राजस्थान शासन सचिवालय में सरकारी नौकरी मिल चुकी हैं

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Apr 03, 2024

She News- छोड़ी सरकारी नौकरी, किया संघर्ष ,बेटे को बनाया रोल मॉडल

She News- छोड़ी सरकारी नौकरी, किया संघर्ष ,बेटे को बनाया रोल मॉडल

Written By Anjali Tomar

जयपुर। एक मां ही होती है जो अपने बच्चों के लिए हद से गुजर जाती है। अपने बच्चों के लिए वह कुछ भी कर सकती है। ऐसी ही एक मां हैं प्रतिभा भटनागर। मनोवैज्ञानिक सलाहकार और विशेष शिक्षक प्रतिभा ने कड़ी मेहनत और संघर्ष से अपने स्पेशल चाइल्ड की परवरिश इस तरह की कि उन्हें राजस्थान शासन सचिवालय में सरकारी नौकरी मिल चुकी हैं और वह यहां तक पंहुचने वाले प्रदेश के पहले ऐसे युवा है जिन्हें ऑटिज्म हैं। एक मां के संघर्ष की कहानी उन्हीं की जुबानी... वर्ष 1992 में अक्षय का जन्म हुआ। जब चार साल का था तब पता चला कि वह ऑटिस्टिक है। तब समझ आ गया था कि विशेष योग्यजन के रूप में उसका जीवन मुश्किलों से भरा होगा, क्योंकि उस समय ऑटिज्म को लेकर आमजन में जागरूकता ही नहीं थी। तब ऐसे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने का भी कानून नहीं था। ऐसे में हमें सभी मोर्चों पर संघर्ष करना पड़ा। मैं अपनी सरकारी नौकरी छोडकऱ अक्षय की देखभाल में जुट गई क्योंकि उसकी देखभाल के साथ उसे समाज में उचित स्थान दिलाना था। पहले स्कूल फिर कॉलेज में एडमिशन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। जिससे वह सामान्य बच्चों के साथ पढ़ सका। इस सफर में उसकी टीचर्स ने सपोर्ट किया।

कर रहीं जागरूकता लाने का प्रयास

प्रतिभा बताती हैं कि वह आमजन को भी ऑटिज्म के प्रति जागरूक करने का प्रयास कर रही हैं। वह कहती हैं कि आज अक्षय है तो कल कई और ऐसे ही बच्चे होंगे, जो ऑटिस्टिक होंगे। उन्हें समाज में उनका हक दिलवाने के लिए आज मैं दूसरों को जागरूक करने का प्रयास कर रही हूं। सचिवालय में भी कर्मचारियों और अधिकारियों के साथ वर्कशॉप करती हूं, जिससे वह ऑटिज्म के बारे में जान और समझ सकें।

जीते कई Award's

प्रतिभा के प्रयासों का नतीजा है कि उन्हें विशेष योग्यजन निदेशालय, राजस्थान सरकार की ओर से रोल मॉडल (ऑटिज्म श्रेणी) से सम्मानित किया गया। विश्व विकलांगता दिवस पर रोल मॉडल ( ऑटिज्म श्रेणी) राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया। चेन्नई में केविनकेयर एबिलिटी मास्टरी अवॉर्ड मिला। वह निर्वाचन विभाग, राजस्थान की ओर से जयपुर जिले का ब्रांड एंबेसडर बने। वह अब तक 4 मेडल राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में 2019 से 2021 तक प्राप्त कर चुके हैं। इसके साथ ही स्टेट पैरा एथलेटिक्स में अक्षय के पास छह स्वर्ण पदक हैं।

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