
जयपुर. रात क बारह बजे हों या सुबह के चार बजे हों, तुरंत वारदात के मौके पर पहुंचती हैं और मामले को सुलझाती हैं। उनके लिए घर परिवार और बच्चों की जिम्मेदारी से ज्यादा काम महत्व रखता है। यही वजह है कि वो अन्य महिला पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गई हैं। पुलिस महकमें में भी आधी आबादी को नेतृत्व का अवसर और काम का श्रेय मिले इसके लिए पहल करते हुए कमिश्नरेट ने महिला थानों के अलावा 56 सामन्य थानों में से दो थाने में संभवतया प्रथम बार महिला थानाधिकारी नियुक्त की गई हैं।
श्यामनगर थाने में संतरा मीणा और रामगढ़ थाने में एकता राज बतौर थानाधिकारी तैनात किया गया है। दोनों ही अपने काम को बखूबी संभाल अन्य थानों के लिए मिशाल कायम कर रही हैं।
पुलिस महकमें में महिला कर्मचारी बहुत पहले से हैं, यही नहीं उच्च पदों पर भी महिलाएं तैनात रहीं। लेकिन बतौर थानाधिकारी वे जिम्मेदारी लेने से कतराती रहीं। हालात ये थे कि प्रदेश में स्थित चालीस महिला थानों में भी अधिकतर पुरुष थानाधिकारी तैनात थे।
लेकिन संतरा और एकता ने यह साबित कर दिखाया है कि वो किसी भी मायने में पुरुष पुलिस अधिकारी से कम नहीं है। दोनों का कहना है कि पहले जहां महिलाएं थाने आकर अपनी शिकायत करने में भी डरती थी, आज वो बिना झिझक अपनी समस्या खुलकर थानाधिकारी को बताती हैं। इतना ही नहीं जल्द ही समस्या का सामाधान होने से खुश भी हैं।
एकता राज (38 ) रामगढ़ थानाअधिकारी
जब एसपी शंकर दत्त शर्मा ने कहा कि मुझे रामगढ़ थानाधिकारी का पद संभालना है। तो मैंने सोच लिया कि सर ने जो विश्वास मुझ पर जताया है, उसे मैं टूटने नहीं दूंगी। मुझे बस यही लगा रहता है कि चाहे जो हो जाए मुझे ये करके दिखाना ही होगा कि महिलाएं पुलिस महकमें में भी बड़ी से बड़ी जिमेदारी बखूबी निभा सकती हैं।
छात्राओं की लेती हूं क्लास, महिला को दिलाया न्याय
इन दिनों नासमझी के चलते नाबालिग छात्राओं के साथ वारदात की घटना अधिक हो रही हैं। ऐसे में स्कूल कॉलेजों में सेमीनार लेती हूं। ताकि छात्राओं के मन से पुलिस का डर निकले। अब छात्राएं उन्हें फोन पर भी अपनी समस्याएं बताती हैं।
एकता राज ने बताया कि एक पीडि़त महिला जो दो साल से थाने के चक्कर काट रही थी। उसका पति कोर्ट पेशी पर नहीं आ रहा था और न ही भरण-पोषण खर्चा दे रहा था। जब वो महिला रोते हुए थाने आई तो, मैंने तुरंत ही जाप्ते को उसके पति की तलाश में लगा दिया। आखिर आरोपित पकड़ा गया और महिला को न्याय मिला।
संतरा मीणा (40), श्याम नगर थानाधिकारी
जब मुझे यह जिमेदारी मिली तो उन्हें एक तरफ खुशी हो रही थी। उन्हें वो मौका मिला है जो महिलाओं की मजबूती साबित करेगा। वहीं थोड़ी नर्वस भी थी कि अगर मैं कमजोर साबित हुई तो आगे किसी और महिला को यह मौका नहीं मिल पाएगा। सुबह के पांच बजे हो या रात के 12 जब भी कोई गंभीर मामला आता है, तुरंत मौके पर पहुंचती हूं।
आधी रात को पकड़े छेड़छाड़ के आरोपित
संतरा मीणा का कहना है कि खासतौर पर महिला अपराध पर मेरी नजर रहती है। कुछ दिनों पहले की बात है, रात करीब ग्यारह बजे एक लड़की अपने मंगेतर के साथ घर जा रही थी। इतने में पीछे से एक निजी हॉस्टल के लड़कों ने उससे छेड़छाड़ की और मारपीट की। दोनों थाने आए लकड़ी रो रही थी, पहले मैंने लड़की को चुप करवाया। फिर मैं जाप्ते के साथ गई और रात को ही उन मनचलों को हॉस्टल से लाई। जिसके बाद लड़की की आंखों में मुझे जो खुद के लिए विश्वास देखा उससे लगा कि मैं किसी पुरुष से कम नहीं हूं।
Published on:
17 Mar 2020 02:24 pm
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