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आज़ादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार, जवाहर कला केंद्र, क्युरियो जयपुर की ओर से खेला हास्य नाटक महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें सामाजिक समस्याओं को हास्य के साथ उठाते हुए महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है।
बिच्छू नाटक
नाटक में नवाब बन्ने मियां और मुन्ने मियां अपने बेटों अफजल और मुनीर की शादी अपनी मर्जी से करवाना चाहते हैं। अफजल और मुनीर शादी अपनी पसंद की लड़कियों से करना चाहते हैं, जिसके लिए वो अपने नौकर रहमत की मदद लेते हैं। रहमत बहुत ही चालाक और होशियार है जो अपनी चालबाजियों, मक्कारी और अपने झूठ बोलने के अंदाज से उनकी समस्याओं को सुलझाता है। जिसकी वजह से नाटक में कई हास्यास्पद परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं जो दर्शकों को गुदगुदाने पर मजबूर कर देती हैं।
चोरों की गाड़ी
गोपाल सरकारी मुलाज़िम है जो अपनी पत्नी चारूलता के साथ किराए के मकान में रहता है। मकान मालिक चक्रधर जो वक्त बेवक्त उनके घर में आता जाता रहता है, गोपाल और चारु को बताता है कि टाइगर नामक बदमाश चंदा लेने आ रहा है, जिससे वो घबरा जाते है। इस समस्या का समाधान ढूंढ ने कोशिश कर ही रहे होते है कि एक बदहवास युवक अमर आ जाता है। वह गोपाल से रिश्वत के पैसे वापिस मांगता है जो उसके पिता ने गोपाल के बॉस को नौकरी लगवाने के लिए दिए थे। इस बात पर गोपाल की अमर से हल्की सी हाथापाई हो जाती है। अमर बेहोश हो जाता है सबको लगता है कि उसकी मौत हो गई। जेल जाने से बचने के लिए सब टाइगर से मदद मांगते है। वो भी पैसों के बदले मदद लिए मान जाता है।
महाकवि कालिदास
परम्परा नाट्य समिति की ओर से कालिदास के जीवन को चरितार्थ करता नाटक का मंचन रविन्द्र मंच के मुख्य सभागार में किया गया। कलाकारों के अभिनय की क्षमता को देखते हुये यह नाटक छाप छोडने में सफल रहा। नाटक का निर्देशन दिलीप भट्ट ने किया। नाटक में दिखाया कि महाकवि कालिदास कैसे विक्षिप्त हुये, उनके जीवन में कई कठिनाईयॉ आई तथा कालिदास के जीवन चरित्र का पता चला। नाटक में विद्योत्तमा, मंकण और कालिदास ने अपने अभिनय से नाटक को अन्तिम तक बांध रखा।
Published on:
22 Nov 2022 09:42 pm
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