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सिब्बल को आंतरिक मुद्दे मीडिया के सामने नहीं उठाने चाहिए: गहलोत

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बयान पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि कपिल सिब्बल को पार्टी के आंतरिक मुद्दे मीडिया के सामने रखने की जरूरत नहीं थी।

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सिब्बल को आंतरिक मुद्दे मीडिया के सामने नहीं उठाने चाहिए : गहलोत

सिब्बल को आंतरिक मुद्दे मीडिया के सामने नहीं उठाने चाहिए : गहलोत

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ( Kapil Sibal ) के बयान ( Statement ) पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि कपिल सिब्बल को पार्टी के आंतरिक मुद्दे मीडिया के सामने रखने की कोई जरूरत नहीं थी।

सीएम गहलोत ने कहा कि उनके बयान से देशभर में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं। दरअसल सिब्बल ने बिहार चुनाव में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन के बहाने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधा है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि पार्टी ने शायद हर चुनाव में पराजय को ही अपनी नियति मान बैठा है। इससे पहले बिहार कांग्रेस के बड़े नेता तारीक अनवर ने भी कहा कि बिहार चुनाव परिणाम पर पार्टी के अंदर मंथन होना चाहिए। उधर, राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने इशारों-इशारों में कह दिया कि कांग्रेस देशभर में अपने गठबंधन सहयोगियों पर बोझ बनती जा रही है।

-पार्टी 1969, 1977, 1989 अैर 1996 में देख चुकी संकट

कांग्रेस ने वर्ष 1969, 1977, 1989 अैर 1996 में कई संकटों का सामना किया, लेकिन अपनी विचारधारा, कार्यक्रमों, नीतियों और पार्टी नेतृत्व में ²ढ़ विश्वास के चलते हर बार पहले अधिक मजबूती से उभरी। हमने हर संकट मेंं अपने में सुधार किया और वर्ष 2004 में सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए सरकार बनाई। इस बार भी हम इन संकटों पर विजय पाएंगे।

-चुनाव में हारने के कई कारण

सीएम गहलोत ने कहा कि चुनाव में हारने के कई कारण होते हैं। हर बार पार्टीजन एकजुटता दिखाते हुए पार्टी नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े रहे, यही वजह रही है कि हम हर संकट के बाद मजबूत होकर उभरे। अब भी देश में कांग्रेस एकमात्र पार्टी है जो राष्ट्र को एकजुट रखते प्रगति के मार्ग पर ले जा सकती है। उल्लेखनीय है कि कपिल सिब्बल ने एक साक्षात्कार में सोमवार को कहा कि हम कांग्रेसियों को मान लेना चाहिए कि कांग्रेस कमजोर हो रही है। कांग्रेस को आत्ममंथन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जनता कांग्रेस को विकल्प भी नहीं मानती। कांग्रेस ने पिछले छह वर्ष में आत्मविश्लेषण नहीं किया तो क्या उम्मीद है कि अब करेगी।