
जयपुर . प्रतिपक्ष के मुख्य सचेतक गोविंद सिंह डोटासरा ने बुधवार को विधानसभा में चिकित्सा विभाग में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता नवीनीकरण मामले में 20 लाख रुपए के लेन-देन का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। इस पर संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि वे तथ्य रख दें, इस मामले की जांच जरूर करवाई जाएगी।
डोटासरा ने कहा कि यह ऐसा पहला विभाग है, जहां बड़ी संख्या में डेपुटेशन पर कर्मचारी लाए गए हैं। इस विभाग में 2000 करीब डेपुटेशन हुए हैं। यहां 12 महीने का अलग, छह महीने का अलग, सरकार जाने तक का अलग, सरकार जाने पर वापस आने पर दुबारा की गारंटी का अलग। उन्होंने कहा कि पहली बार ऐसा देखा है कि डेपुटेशन पर एक को यहां से लगाया जाता है फिर दूसरी जगह। डोटासरा ने कहा कि कोई विवेक कोटा हो तो सीकर जिले को पीएचसी सीएचसी दिला दो। उन्होंने कहा कि कहा कि 1200 करोड़ खर्च करने के बावजूद सात में से एक भी मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं कर पाए। डोटासरा ने कहा कि चिकित्सा मंत्री के होते हुए भी डॉक्टरों की हड़ताल खत्म करने के लिए तीन मंत्रियों की समिति बनाई। यह चिकित्सा मंत्री का फेलियर है। इन्हेंं बाहर कर दिया गया। उन्होंने डॉक्टरों की हॉस्टल को चिकित्सा मंत्री का ईगो बताया। साथ ही उन्होंने कहा की इस हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में लोग मारे गए।
काम देखते थे शर्मा
डोटासरा ने नर्सिंग काउंसिल में गोविंद शर्मा को रजिस्ट्रार नियुक्त करने का मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि नियम विरूद्ध क्यों लगाया कि हाईकोर्ट को उसे हटाने के आदेश देने पड़े। उन्होंने कहा कि इसमें कोर्ट में क्यों गए। उन्होंने कहा कि ये चहेते थे और इनका काम देखते थे। इस बीच चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने डोटासरा पर गरीबों की जमीन खरीदकर उस पर कांग्रेस कार्यालय बनाने का आरोप लगाया, डोटासरा ने नकारा।
Published on:
01 Mar 2018 03:34 pm
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