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एक वृद्ध बेवा सरकारी दफ्तरों में जा-जाकर यह बताती रही कि वह जिंदा है। उसकी जमीन-जायदाद को हथियाने के लिए उसे सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया है। इस दौरान वह सभी सरकारी योजनाओं का लाभ भी लेती रही, लेकिन कोई मानने को तैयार ही नहीं था कि वह जिंदा है। मामला सामने आने के 6 साल बाद एसडीएम ने उसे जीवित तो बताया लेकिन सरकारी दस्तावेजों में वह मृत ही थी।
अंतत: 10वें साल में उसे कलक्टर द्वारा पूरी तरह जीवित घोषित किया गया। बता दें कि यह अजीबोगरीब मामला छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से सामने आया है। दरअसल जयनगर थाना क्षेत्र के लटोरी चौकी अंतर्गत ग्राम चंदौरीडांड़ गंगापुर निवासी भुइली बाई (62) के पति जयराम की 1997 में मौत हो चुकी थी।
भुइली बाई के कोई संतान नहीं होने के कारण वह रिश्तेदारों के घर रहकर जीवन-यापन कर रही थी। इसी बीच वर्ष 2008 में सरपंच के साथ मिलकर ग्राम गंगापुर निवासी भागीरथी कंवर व पनमेश्वरी कंवर द्वारा उसकी पैतृक संपत्ति हथियाने साजिश रची गई। ग्राम पंचायत में प्रस्ताव पारित कर भुइली बाई को मृत घोषित कर दिया गया और उसकी पूरी संपत्ति अपने नाम करा ली गई।
कलक्टर ने घोषित किया जिंदा तो मिली संपत्ति
एसडीएम द्वारा जिंदा घोषित किए जाने के बाद भी महिला सरकारी दस्तावेजों में मृत ही रही। वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटती रही लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अंतत: दिसंबर 2022 में कलक्टर ने बेवा भुइली बाई के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसे जिंदा घोषित किया और उसकी पैतृक संपत्ति उसके नाम करने का आदेश पारित किया। ऐसे में वृद्ध बेवा को खुद को जिंदा साबित करने में 10 साल लग गए।
करती रही वोटिंग, लेती रही योजनाओं का लाभ
इस मामले में सरकारी सिस्टम की बड़ी खामी उजागर हुई। बेवा खुद को जिंदा बताती रही लेकिन सबकुछ जानकर भी अफसर उसे न्याय देने में टालमटोल करते रहे। सबसे बड़ी बात यह कि मृत घोषित होने के 15 सालों तक बेवा सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेती रही। यहां तक कि हर चुनाव में उसने वोटिंग भी की।
2012 में एसडीएम से की शिकायत
पीड़िता भूइली बाई को 2012 में जब यह बात पता चली कि उसे सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर उसकी पूरी संपत्ति हथिया ली गई है तो उसने एसडीएम से मामले की शिकायत की। उसने कहा कि साहब, वह जिंदा है। एसडीएम ने शिकायत के 6 साल बाद वर्ष 2018 में महिला को जिंदा घोषित कर पूरी संपत्ति उसके नाम करने का आदेश दिया। इसके बाद भी महिला की संपत्ति उसके नाम नहीं की गई और वह सरकारी दस्तावेजों में मृत ही रही।
Published on:
02 Jan 2023 04:24 pm

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