
जयपुर। शास्त्रीय संगीत को भारतीय युवाओं में बढ़ते वेस्टर्न म्यूज़िक के क्रेज से कोई खतरा नहीं है। क्लासिकल म्यूज़िक अपना प्रभाव हमेशा बनाए रखने में सक्षम है। वैसे भी बिना शास्त्रीय संगीत के ज्ञान के किसी और मौसिकी की कल्पना असंभव है।
यह कहना है विश्व प्रसिद्ध सितार वादक अनुपमा भागवत का। अनुपमा जयपुर के जयपुर के जेकेके में आयोजित डिवाइन कॉर्ड्स फेस्टिवल में सोमवार को अपने सितार वादन का जादू संगीत प्रेमियों पर चला चुकी हैं। वे कहती हैं कि पश्चिमी देशों के युवाओं का रुझान भी भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति बढ़ रहा है। वे भारत आकर सीख रहे हैं।
उन युवाओं के दिल में शास्त्रीय संगीत के प्रति इतना सम्मान कि वे इसकी साधना करते हुए इसके साथ आध्यात्मिक स्तर तक जुड़ रहे हैं। जाहिर है, भारतीय युवाओं में बढ़ते रीमिक्स, फ्यूज़न आदि के क्रेज के बावजूद शास्त्रीय संगीत का दीपक जगमगाता रहेगा।
अनुपमा का कहना है कि केंद्र और राज्यों की सरकारों को जेकेके और ऐसे ही कला केंद्रों, अकादमियों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत को प्रोत्साहन देना चाहिए। यह भारत और भारतीयता की पहचान है। इस विधा का गौरव बढ़ाना हर भारतीय का फर्ज है।
विरासत में मिला संगीत
बेंगलूरु की सितार वादक अनुपमा भागवत के पिता वॉयलिन वादक थे। घर में संगीत का माहौल था, जिसने उन्हें बचपन में ही संगीत की शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।
Published on:
26 Nov 2019 06:23 pm
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