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एसएमएस अस्पताल में पिछले साल स्किन बैंक तो खुला, लेकिन डोनर्स का अभाव आज भी

पिछले साल एसएमएस अस्पताल में स्किन बैंक खोला गया। यह उत्तर भारत का पहला स्किन बैंक है। स्किन बैंक खुल तो गया, लेकिन डोनर्स का अभाव आज भी है।

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एसएमएस अस्पताल में पिछले साल स्किन बैंक तो खुला, लेकिन डोनर्स का अभाव आज भी

एसएमएस अस्पताल में पिछले साल स्किन बैंक तो खुला, लेकिन डोनर्स का अभाव आज भी

जयपुर। पिछले साल एसएमएस अस्पताल में स्किन बैंक खोला गया। यह उत्तर भारत का पहला स्किन बैंक है। स्किन बैंक खुल तो गया, लेकिन डोनर्स का अभाव आज भी है। क्योंकि स्किन की जरूरत के हिसाब से मरीजों की डिमांड पूरी नहीं हो पाती है। एसएमएस अस्पताल में जून, 2022 में स्किन बैंक खुला था। जिसके बाद से अब तक स्किन बैंक के पास करीब 25 से 30 कॉल आई। जब टीम मौके पर पहुंची तो डोनर्स की स्किन की जांच की गई। इनमें से कई डोनर्स के कैंसर व अन्य बीमारियां थी। जिसकी वजह से सिर्फ 8 डोनर्स ऐसे मिले। जिनकी स्किन को लिया गया।

पिछले दिनों एसएमएस अस्पताल में डोनर्स के परिजनों का सम्मान किया गया था। इस दौरान डोनर्स के परिजनों ने डॉक्टर्स के सामने अपना दर्द जाहिर किया था। एक परिजन का कहना था कि जागरूकता के अभाव में स्किन डोनेशन का अभाव है। एक डोनर के परिजन ने कहा कि उनकी पत्नी का देहांत हो चुका है। जिनके देहांत होने पर उन्होंने स्किन व अन्य आर्गन डोनेशन किया। लेकिन अब भी कई लोगों को डोनेशन कहां और कैसे करना है। इसका मालुम नहीं चलता है। ऐसे में सभी निजी अस्पतालों में एक हेल्पलाइन नंबर होना चाहिए। जिससे कोई डोनेशन करना चाहे तो संपर्क कर सकता है। ताकी सही समय पर व्यक्ति डोनेशन कर सके।

डॉक्टर्स का कहना, लोगों में अवेयरनेस जरूरी

एसएमएस अस्पताल में उत्तर भारत का सबसे पहला स्किन बैंक पिछले साल बनाया गया। स्किन बैंक में तीन से चार साल तक स्किन को सेव रखा जा सकता है। यूनिट हेड डॉ. राकेश जैन ने बताया कि माइनस 40 डिग्री में स्किन को रखा जाता है। बैंक में तुलनात्मक रूप से स्किन का डोनेशन बहुत ही कम हुआ। जरूरी है कि लोगों में स्किन डोनेशन के प्रति अवेयरनेस आए और अधिक से अधिक लोग यह डोनेट करें।

स्किन को 5 साल तक रखा जा सकता है सुरक्षित

इस स्किन बैंक में करीब एक करोड़ रुपयों की लागत से अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गए हैं। यहां ब्रेन डेड मरीज की स्किन लेने के साथ ही उसकी प्रोसेसिंग के लिए उपकरण मौजूद हैं। स्किन बैंक में माइनस 70 डिग्री सेल्सियस में स्किन को रखने के लिए फ्रीजर स्थापित किए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि डोनेट स्किन को 5 साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है ताकि जब जरुरत हो उसे उपयोग में लिया जा सके।

अन्य बीमारियों में मददगार है स्किन

डॉ राकेश कुमार जैन ने बताया कि ब्रेनडेड मरीज की जांघ, पैरों और पीठ से स्किन ली जाती है। स्किन ग्राफ्टिंग सिर्फ जलने वालों में ही नहीं बल्की चोट लगने में और स्किन की अन्य बीमारियों में भी काफी मददगार है।

स्किन डोनेशन के लिए कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं

व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात महज छह घंटे के भीतर स्किन ली जानी चाहिए। इसमें कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और महज परिजनों की सहमति ली जाती है। मेडिकल विभाग के महज एक डोनर पत्र पर हस्ताक्षर करने होते हैं। कोई भी 18 साल से अधिक उम्र का व्यक्ति स्किन डोनेट कर सकता है। इसमें अन्य अंगों की तरह जटिलताएं नहीं हैं और उम्र की भी कोई सीमा नहीं है। डोनर की मृत्यु के बाद टीम पहुंच कर सामान्य प्रक्रिया कर महज पांच से छह घंटे में स्किन ले कर प्रिजर्व कर लेती है।