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पाठशाला छोड़ गुरुजी चले बर्तन खरीदने, वजह जानकर चौंक जाएंगे

चौमूं शहर में 298 ब्लॉक के स्कूली बच्चों के लिए कर रहे बर्तनों की खरीदारी

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पाठशाला छोड़ गुरुजी चले बर्तन खरीदने, वजह जानकर चौंक जाएंगे

जयपुर

गुरुजी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना छोड़ बाजारों में बर्तनों की खरीदारी करने में जुट गए हैं। शिक्षकों ने भले ही अपने घर के लिए कभी बर्तन नहीं खरीदे होंगे लेकिन शिक्षा विभाग उनसे बर्तनों की खरीदारी करवा रहा है। रोजाना बाजारों में बर्तनों की दुकानों पर शिक्षकों की भीड़ दिखाई दे रही है। गौरतलब है कि इन बर्तनों में गुरुजी अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत सभी सरकारी और मदरसों में 1 से 8 तक के बच्चों को 2 जुलाई को दूध वितरण करेंगे। इसलिए योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए गुरुजी तैयारियों में जुटे हुए हैं।

खरीदे जा रहे स्टील के बर्तन

अध्यापक रूपकिशोर शर्मा ने बताया कि ब्लॉक प्रारंभिक गोविंदगढ़ पंचायत समिति के अधीन 281, चौमूं शहर की 17 सरकारी स्कूलों तथा मदरसों को मिलाकर 298 स्कूलों में बच्चों को दूध पिलाने के लिए स्कूलों के गुरुजी स्टील के बर्तनों की खरीदारी कर रहे हैं। जिनमें स्टील की टंकी, भगोने और गिलास सहित अन्य स्टील के बर्तन शामिल हैं।

अब तक बिक चुके लाखों रुपए के बर्तन

बर्तन व्यापारी महेश नाणका ने बताया कि अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत अब तक गोविंदगढ़ ब्लॉक और चौमूं शहर के शिक्षकों को 7 हजार के करीब स्टील के बर्तनों की खरीदारी की है। यही नहीं चौमूं विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर दूर-दराज की स्कूलों के भी गुरुजी बर्तन खरीदने के लिए आ रहे हैं।

अन्नपूर्णा दूध योजना की ये हैं खामियां

- 35 रुपए लीटर दूध उपलब्ध नहीं हो पाएगा।
- रोजाना दूध की मात्रा का सही आंकलन कैसे होगा।
- दूध प्रार्थना सभा से पहले या बच्चे प्रार्थना सभा के दौरान बच्चे बाद तक भी आते हैं।
- दूध को मीठा करने की राशि का कोई प्रावधान नहीं है।
- दूध को गर्म करने में ईंधन की खपत राशि का कोई प्रावधान नहीं है।
- कुक हेल्पर का अल्प मान्य देय दिया जा रहा है क्या वह कम राशि में प्रात: 7 बजे आकर दूध गर्म करने व वितरण का कार्य करेगा।

फैक्ट फाइल

2500 रुपए की राशि बर्तनों के लिए आवंटित
281 स्कूल ग्रामीण इलाकों में
17 स्कूल शहरी इलाके में

सरकारी स्कूलों में 2 जुलाई से शुरू होने वाली अन्नपूर्णा दूध योजना को लेकर ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों की बैठक ली गई थी। बैठक में सभी अधिकारियों को योजना को लेकर निर्देश दिए गए थे कि सरकारी विद्यालयों और मदरसा में बच्चों को दूध पिलाने की दूध की गुणवत्ता पर ध्यान और बर्तन खरीदने जैसी तैयारियों के बारे में दिशा-निर्देश दिए थे। - प्रियवृत सिंह चारण, उपखंड अधिकारी, चौमूं