
SMS Hospital : सरकार भले ही प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आमजन को नि:शुल्क इलाज उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है, लेकिन मरीजों की जेब लगातार कट रही है। दरअसल, सरकारी अस्पतालों में लपकागिरी चरम पर है। अस्पताल प्रशासन का दावा भले ही कुछ भी हो, ये लपके मरीजों पर दबाव डालकर अपनी कमीशन बंधी दुकानों पर ले जाते हैं।
राजधानी के सवाई मानसिंह अस्पताल के धन्वंतरि ब्लॉक की ओपीडी में बने मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के काउंटरों पर लपकों का जमावड़ा देखा जा रहा है। वे मरीज व उनके परिजनों के हाथ से तुरंत पर्ची लपक लेते हैं और सस्ती दवा उपलब्ध करवाने का झांसा देकर उनकी जेेब काट रहे हैं। यह लपकागिरी अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों के चैंबर व एसएमएस पुलिस थाना से चंद कदम की दूरी पर चल रही है।
ओपीडी कक्ष में बने मुख्यमंत्री नि:शुुल्क दवा काउंटर पर जो दवाइयां अनुपलब्ध रहती हैं, उसके लिए फार्मासिस्ट मरीज व उनके परिजन को 11 नंबर दवा वितरण केंद्र (डीडीसी) भेज देते हैं। वहां पर समस्त विभागों की ओपीडी के मरीज पहुंचते हैं, इसलिए भीड़ लगी रहती है। मरीजों को घंटों कतारों में खड़ा रहना पड़ता है। इसका फायदा लपके उठा रहे हैं। वे झुंड में खड़े रहते हैं। जैसे ही मरीज वहां पहुंचता है तो तुरंत उसके हाथ से पर्ची लपक लेते हैं। यहां दवा न मिलने, भीड़, अव्यवस्था का हवाला देते हुए सस्ती दवा दिलवाने का झांसा देकर फंसा लेते हैं। वे उन्हें अपने मेडिकल स्टोर पर ले जाते हैं और महंगी दरों में दवा बेचते हैं।
अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि एसएमएस अस्पताल में सब कुछ नि:शुल्क होने के बाद उम्मीद थी कि लपकों से निजात मिलेगी लेकिन अब भी लपकागिरी जारी है। बताया जा रहा है कि वार्डों में भी लपके घूमते रहते हैं। इसकी रोकथाम को लेकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही मरीजों को भी दवा की उपलब्धता में सहूलियत देने की आवश्यकता है। इसके लिए जिम्मेदारों को आंख पर बंधी काली पट्टी हटानी होगी।
11 नंबर डीडीसी काउंटर पर गार्ड लगा रखे हैं। फिर भी लपकागिरी चल रही है तो ठोस कार्रवाई करेंगे। अभी पुलिस को सूचना कर देता हूं, पहले से भी कह रखा है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। मरीजों की भीड़ खत्म करने के लिए भी अतिरिक्त इंतजाम करेंगे।
- डॉ. अचल शर्मा, अधीक्षक, एसएमएस अस्पताल
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Updated on:
26 Apr 2024 12:27 pm
Published on:
26 Apr 2024 12:26 pm
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