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‘आज खेलने नहीं आ पाऊंगा’ कुछ घंटों बाद आई डॉक्टर एन.एल. डिसानिया के निधन की खबर, मनोरोग विशेषज्ञों से चल रहा था इलाज

जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एन.एल. डिसानिया के अचानक निधन से पूरा अस्पताल परिवार सदमे में है। सहयोगियों के मुताबिक मंगलवार तक वे सामान्य रूप से काम कर रहे थे और बुधवार सुबह बैडमिंटन खेलने से मना करने के कुछ ही घंटों बाद उनके निधन की सूचना मिली।
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SMS HOspital Doctor Death

श्रद्धांजलि अर्पित करते हॉस्पिटल के कर्मचारी और डॉ. एन.एल. डिसानिया की फाइल फोटो: पत्रिका

Dr. N.L. Disania Death Case Update: मंगलवार तक सब कुछ सामान्य था। सहयोगियों से मुलाकात हुई, विभाग का प्रभार सौंपा और बुधवार को अवकाश पर रहने की बात कहकर घर चले गए। किसी ने नहीं सोचा था कि अगली सुबह बुधवार को उनके निधन की खबर पूरे SMS मेडिकल कॉलेज को स्तब्ध कर देगी। फोरेंसिक मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. एन.एल. डिसानिया के अचानक निधन ने चिकित्सकों, रेजिडेंट्स और कर्मचारियों को गहरे सदमे में डाल दिया। डॉ. डिसानिया के करीबी सहयोगियों ने बताया कि बुधवार को अवकाश पर रहने की बात कहते हुए विभाग का प्रभार वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. डी.के. शर्मा को सौंप दिया था।

सहयोगियों ने बताया कि कई बार उनसे हालचाल पूछा लेकिन उन्होंने कभी अपनी परेशानी खुलकर साझा नहीं की। वे हमेशा मुस्कराकर बात टाल देते थे। उनका पार्थिव शरीर SMS अस्पताल लाया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब परिजन पार्थिव शरीर लेकर रवाना हुए तो कई सहयोगी भावुक हो गए और पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी।

सभी के लिए सहज थे डॉ. डिसानिया

डॉ. डिसानिया के वरिष्ठ सहयोगियों के अनुसार, उनकी पहचान एक शांत, विनम्र और मिलनसार चिकित्सक के रूप में थी। वे सीनियर और जूनियर सभी से समान आत्मीयता और सम्मान के साथ मिलते थे। विभाग में नए चिकित्सकों का मार्गदर्शन करना और पूरी टीम को साथ लेकर चलना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। मार्च 2025 में उन्होंने विभागाध्यक्ष का पद संभाला था, जिसका कार्यकाल अगले वर्ष मार्च तक था। वे विभाग में नई फोरेंसिक लैब शुरू करने की तैयारी में जुटे हुए थे। इसके अलावा मोर्चरी की व्यवस्थाओं में भी उनके कार्यकाल में कई सुधार हुए।

सोचा नहीं था कि उनका ही पोस्टमार्टम कराना पड़ेगा

एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने भावुक होकर कहा कि वर्षों से साथ काम किया। मंगलवार तक सामान्य बातचीत हुई थी। कभी कल्पना भी नहीं की थी कि अगले ही दिन उनका पोस्टमार्टम कराना पड़ेगा। ये हम सभी के लिए व्यक्तिगत और अपूरणीय क्षति है।

आज बेटी को एयरपोर्ट छोड़ने जाना है, खेलने नहीं आ पाऊंगा

मोर्चरी में मौजूद डॉ. डिसानिया के परिचित माधव सिंह ने बताया कि वे पांच वर्ष से उनके साथ नियमित रूप से बैडमिंटन खेलते थे। बुधवार सुबह भी उन्हें खेलने के लिए फोन किया गया। इस पर डॉ. डिसानिया ने कहा, 'आज बेटी को एयरपोर्ट छोड़ने जाना है, इसलिए खेलने नहीं आ पाऊंगा।' माधव सिंह ने बताया कि इसके कुछ समय बाद उनके निधन की सूचना मिली। यह खबर सुनते ही हम सभी स्तब्ध रह गए। यकीन ही नहीं हुआ कि कुछ देर पहले जिनसे बात हुई थी, उनके बारे में ऐसी दुखद खबर मिलेगी।

निजी अस्पताल की प्रक्रिया पर सवाल

डॉ. डिसानिया को घर से झोटवाड़ा स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित किया गया। उनका पार्थिव शरीर एसएमएस अस्पताल भेजा गया। एसएमएस मोर्चरी पहुंचने पर स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी जिसके बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई शुरू की गई। इस घटनाक्रम को लेकर यह सवाल भी उठे कि ऐसे मामलों में पुलिस को सूचना देने की प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर किया गया।

पत्नी शादी में, बेटी को किया बाय-बाय

परिजन व परिचितों ने बताया कि डॉ. डिसानिया के परिवार में शादी है। पत्नी शादी में गई हुई है और वे घर पर ही रुक गए थे। बुधवार सुबह करीब छह बजे उनकी बेटी फ्लाइट से बेंगलूरु गई थी और उनका बेटा बहन को एयरपोर्ट छोड़ने गया था। घर से बेटी एयरपोर्ट के लिए निकली, तब उन्होंने बाय-बाय भी किया। करीब 7 बजे बेटा लौटा, उसके कुछ देर बाद पड़ोसी चिल्लाए तब पता चला। डॉ. डिसानिया के दामाद भी एसएमएस अस्पताल में न्यूरोसर्जन हैं। उनका बेटा भी चिकित्सक है। वहीं पुलिस ने डॉक्टर का मोबाइल भी खंगाला, जिसमें दो मनोरोग विशेषज्ञों से इलाज चलने की पर्ची मिली। डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि तनाव किस चीज को लेकर था, इसकी जांच की जा रही है।