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संपादकीय: आंतरिक सुरक्षा के बदलते परिवेश को समझना होगा

पहले जहां सीमा पार से आने वाले घुसपैठिए और पारंपरिक हथियार मुख्य चुनौती थे, वहीं अब 'हाइब्रिड टेररिज्म' और 'डिजिटल जासूसी' के रूप में नए और जटिल खतरे सामने हैं।

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भारत की आंतरिक सुरक्षा का परिदृश्य हाल के वर्षों में तेजी से बदला है। जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों में आतंक के फन कुचले जाने के बाद शत्रु देश और आतंकी संगठन फिर से उसी पंजाब पर फोकस कर रहे हैं, जहां से देश में आतंक का दौर शुरू हुआ था। वे नई-नई तकनीकों और स्थानीय अपराधियों के इस्तेमाल की रणनीति पर काम कर रहे हैं। पहले जहां सीमा पार से आने वाले घुसपैठिए और पारंपरिक हथियार मुख्य चुनौती थे, वहीं अब 'हाइब्रिड टेररिज्म' और 'डिजिटल जासूसी' के रूप में नए और जटिल खतरे सामने हैं। पंजाब की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने पिछले कुछ समय में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से जुड़े क्रॉस बॉर्डर आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। एनआइए ने भी उस जासूसी नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है, जिसने भारतीय रणनीतिक महत्व वाले क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए थे, ताकि आतंकियों को लाइव फुटेज मिल सके। स्पष्ट संकेत हैं कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि हमारे घरों की दीवारों पर लगे कैमरों और जेब में रखे स्मार्टफोन के जरिये भी लड़ा जा रहा है। ऐसी-ऐसी तकनीकें भी आ गई हैं, जो किसी डेटा में सेंधमारी के लिए पासवर्ड की जरूरत को खत्म करती हैं।

पंजाब के सीमावर्ती जिलों में हर दूसरे दिन मिलने वाले आइईडी और आरडीएक्स इस बात का प्रमाण हैं कि आतंकी अब भीड़भाड़ वाले इलाकों और महत्त्वपूर्ण संस्थानों को दहलाने की फिराक में हैं। यह भी सामने आया है कि कनाडा और जर्मनी में बैठे कथित खालिस्तानी तत्वों और आइएसआइ के बीच का अपवित्र गठबंधन अब 'टारगेटेड किलिंग' और ड्रोन के जरिये हथियारों की तस्करी को बढ़ावा दे रहा है। सबसे बड़ी चिंता का विषय 'टेरर-गैंगस्टर नेक्सस' है। लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ जैसे अपराधियों के नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकी हैंडलर्स रसद और हथियारों की सप्लाई के लिए कर रहे हैं। इसमें 'ड्रग्स सिंडिकेट' भी मददगार है। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया जिसे प्रमुख नेताओं और धार्मिक गुरुओं को निशाना बनाने का काम सौंपा गया था। सीमावर्ती जिलों में लगभग हर हफ्ते ऐसे मॉड्यूल पकड़े जा रहे हैं जो पाकिस्तान से ड्रोन के माध्यम से आने वाले आइईडी, आरडीएक्स, पिस्तौल और हेरोइन को रिसीव कर आगे सप्लाई करते हैं।
अपराधी गिरोह, इलेक्ट्रॉनिक जासूसी और आतंकवाद के इस आधुनिक गठजोड़ ने यह साफ कर दिया है कि अब सुरक्षा एजेंसियां सिर्फ पारंपरिक सुरक्षा उपायों के भरोसे नहीं रह सकतीं। एआइ के इस दौर में सुरक्षा तंत्र को भी भविष्योन्मुखी बनाना होगा। पंजाब में पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल चेतावनी है कि यदि हम तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और सुरक्षा के प्रति सतर्क नहीं हुए तो आने वाले समय में दुश्मन नुकसान पहुंचा सकते हैं। हमें साइबर सुरक्षा को राष्ट्रीय मिशन बनाते हुए सीमावर्ती इलाकों में विशेष ध्यान देना होगा।