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जम्मू और कश्मीर जा रहे सैनिक को विमान में पड़ा दिल का दौरा, नर्स ने बचाई जान

देश सेवा के लिए डयूटी पर जा रहे एक जवान की एक महिला ने जान बचाई है जिसकी चारों ओर तारीफ हो रही है। दरअसल जम्मू और कश्मीर में फिर से ड्यूटी करने के लिए नई दिल्ली जा रहे नीलांबुर के रहने वाले जवान सुमन को विमान में कार्डियक अरेस्ट हुआ। उसी विमान में फ्लोरेंस नाइटिंगेल 2020 पुरस्कार विजेता पी गीता भी थी। कोझीकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इस पूर्व नर्सिंग अधीक्षक पी गीता ने सुमन की जान बचाई।

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देश सेवा के लिए डयूटी पर जा रहे एक जवान की एक महिला ने जान बचाई है जिसकी चारों ओर तारीफ हो रही है। दरअसल जम्मू और कश्मीर में फिर से ड्यूटी करने के लिए नई दिल्ली जा रहे नीलांबुर के रहने वाले जवान सुमन को विमान में कार्डियक अरेस्ट हुआ। उसी विमान में फ्लोरेंस नाइटिंगेल 2020 पुरस्कार विजेता पी गीता भी थी। कोझीकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल की इस पूर्व नर्सिंग अधीक्षक पी गीता ने सुमन की जान बचाई।

गीता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रपति भवन में उनके सम्मान में बुलाए गए समारोह में भाग लेने के लिए नई दिल्ली जा रही थीं। वह कन्नूर से एयर इंडिया की फ्लाइट में सवार हुई। यात्रा शुरू होने के सिर्फ आधे घंटे में ही उसी विमान में सवार सुमन को दिल का दौरा पड़ा। जब वायुयान परिचारक मुस्तफा ने पूछा कि क्या कोई नर्स या डॉक्टर इस विमान में सवार है तो गीता तुरंत आगे आई। उसने सुमन की स्थिति की जांच की और पाया कि उसका रक्तचाप और पल्स रेट खतरनाक रूप से कम है।

उसने सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) शुरू किया। मुस्तफा की मदद से उसने नसों में तरल पदार्थ दिया। तब तक मोहम्मद अशील सहित कई अन्य डॉक्टर मदद के लिए आगे आ गए थे। उनके प्रयासों ने सुमन को बचाने में मदद की। गीता ने बताया सीपीआर देने के बाद मुझे सुमन की एक नाड़ी (पल्स) मिली और हम कामयाब रहे। पेरिंथलमन्ना के डॉ प्रेम कुमार और एक सर्जन ने भी मदद की। हमने उसे फ्लाइट के पिछले हिस्से तक ले जाने के लिए कंबल का इस्तेमाल किया। मैं पूरी यात्रा में उनके साथ थी।

समय पर सीपीआर महत्वपूर्ण साबित हुआ
कोझीकोड की मूल निवासी गीता 2019 में केरल सरकार के सर्वश्रेष्ठ नर्स पुरस्कार की प्राप्तकर्ता हैं। डॉ अशील ने कहा कि उन्हें लगा कि गीता सुमन की रिश्तेदार हैं। लैंडिंग के समय अपनी सीट पर लौटने के बाद ही मुझे एहसास हुआ कि वह नर्स थी। अशील ने कहा कि अगर गीता ने समय पर सीपीआर नहीं दिया होता तो सुमन की जान नहीं बचती। सुमन को नई दिल्ली में उतरने पर एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।