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RPSC: सरकार फिर फेल

नौकरी की परीक्षा में कुछ पास तो कुछ फेल कर दिए जाते हैं। फेल करने का अर्थ यह नहीं कि उन्हें सजा दी गई, बल्कि उन्हें उस पद के योग्य नहीं माना गया। ये तो बात हुई परीक्षा देने वालों की।

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नौकरी की परीक्षा में कुछ पास तो कुछ फेल कर दिए जाते हैं। फेल करने का अर्थ यह नहीं कि उन्हें सजा दी गई, बल्कि उन्हें उस पद के योग्य नहीं माना गया। ये तो बात हुई परीक्षा देने वालों की। अब परीक्षा लेने वालों का क्या करें। उनकी योग्यता का मूल्यांकन कोई क्यों नहीं करता। ऐसा तो है नहीं कि परीक्षा सिर्फ बेरोजगार ही देते हैं, परीक्षा तो हर बार राजस्थान लोक सेवा आयोग भी देता है। उसकी योग्यता का भी तो पैमाना तय होना चाहिए। मसलन सभी परीक्षा समयबद्ध, निष्पक्ष, नकल रहित और बिना पर्चा आउट हुए सम्पन्न हो। सवाल है कि क्या हकीकत में ऐसा हो रहा है। जवाब है बिल्कुल नहीं। पिछले कुछ समय से तो भर्ती परीक्षा मजाक बनकर रह गई। या यों कहें कि मजाक बना दी गई। आयोग सदस्य जब खुद भर्ती परीक्षा का पर्चा आउट कर दे तो बेरोजगारों के साथ इससे बड़ा अपराध और क्या होगा।
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आयोग की निष्पक्षता ही कलंकित हो गई। पहली बार यह साबित हो गया कि आयोग से प्रश्न पत्र आउट हुआ। अर्थात अपनी ही परीक्षा में आयोग फेल हो गया। फेल होने के साथ ही उसकी योग्यता पर भी सवाल खड़े हो गए। जैसे बेरोजगारों को फेल होने पर अयोग्य मानकर भर्ती से हटा दिया जाता है। क्यों नहीं वैसे ही आयोग को भी भंग करके नए सिरे से योग्य लोगों को कमान सौंपी जाए। आयोग अध्यक्ष की जिम्मेदारी फिलहाल संजय श्रोत्रिय के पास है। वह इस पद से पहले इसी शासन में बतौर पुलिस महानिरीक्षक मुख्यमंत्री सुरक्षा एवं सतर्कता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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शिक्षक भर्ती परीक्षा में तो आयोग की निष्पक्षता तो पहले ही सवालों के घेरे में है, इस बीच नई खबर आई है। अबकी बार कांग्रेस के बड़े नेता ने अधिशासी अधिकारी (ईओ) की भर्ती में पास कराने का ठेका उठा लिया। कैबिनेट दर्जा प्राप्त मंत्री रह चुके गोपाल केसावत को एसीबी ने पास कराने के नाम पर साढ़े 18 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा है। अब सवाल यह उठता है कि केसावत ने पास कराने का ठेका किसी के तो भरोसे लिया होगा। ऐसा तो है नहीं कि वह ठग विद्या में माहिर है। बेरोजगारों को पास कराने का भरोसा दिलाने के लिए उन्होंने किसी के सम्पर्क में होने का तो जरूर विश्वास दिलाया होगा। उन्होंने या तो भरोसा दिया होगा कि चिंता मत करो आयोग के फलां सदस्य मेरे नजदीकी हैं, तुम फेल भी हो गए तो मैं उनसे बात करके तुम्हें पास करवा दूंगा। या फिर कांग्रेस सरकार के किसी बड़े मंत्री या पदाधिकारी से नजदीकी का भरोसा दिलाया होगा। इसी सवाल की खोज में केसावत का सोशल मीडिया अकाउंट खंगाला तो समझ में आया कि केसावत के तो राज्य से लेकर केन्द्रीय स्तर तक के हर बड़े कांग्रेस नेता के साथ फोटो हैं।