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हॉरर और कॉमेडी नाटक ‘बल्लभपुर की रूपकथा’ का मंचन

लाइव प्ले में मंच पर हॉरर और हास्य की जुगलबंदी आई पसंद

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रंगमंच पर आमतौर पर हॉरर प्ले का मंचन कम ही होता है। गुरुवार को जवाहर कला केन्द्र के रंगायन सभागार में रंगजुम्बिश संस्था की ओर से 'बल्लभपुर की रूपकथा' नाटक का मंचन हुआ। बादल सरकार के लिखे इस हॉरर-कॉमेडी नाटक को सुफियान सूफी ने निर्देशित किया था।
नाटक में दिखाया गया कि रमापति भुइयां के पड़पोते भूपति राय (राजाबाबू) की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह अपने पूर्वजों के बल्लभपुर में बने 400 साल पुराने महल को बेचने के प्रयास में लगा हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महल में रगुदा नाम के किसी व्यक्ति का भूत है, जो डरावनी आवाजें निकालकर लोगों को डराता रहता है।

महल बेचने में रहा कामयाब
नाटक में रगुदा की डरावनी आवाजों, कविता पाठ और संस्कृत के श्लोकों के बीच जब कहानी आगे बढ़ती है, तो मालूम होता है कि राजाबाबू ने शहर के कई लोगों से उधार ले रखा है। सबका कर्जा चुकाने के लिए वो महल को बेचना चाहता है, लेकिन उसेे कोई खरीदार नहीं मिल रहा है। कई दिनों बाद एक खरीदार आता है, जिसे प्रभावित करने के लिए वह राजा होने का नाटक करता है और अपने लेनदारों को ही नौकर बना लेता है। जब सेठ आता है तो परिस्थितियों के चलते हास्य पैदा होता है। कई प्रयासों के बाद राजाबाबू भूतिया महल बेचने में कामयाब हो जाता है। अंत में राजबाबू उस सेठ की लड़की से शादी कर लेता है।

२३ साल के एक्टर ने 65 वर्षीय बूढ़े का रोल किया
नाटक में 23 साल के द्रविल छावड़ा ने 65 साल के मनोहर का किरदार निभाया। उन्होंने बताया कि इसके लिए पिछले 5 महीने से मेहनत कर रहा हूं। ताकि कमर झुकी हुई लगे।

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