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लालची फकीर

जरूरत से ज्यादा माल इकठ्ठा करना अपने लिए मुसीबत को बुलाना है। यह नियम सिर्फ तुम्हारे लिए ही नहीं दोस्त, यह उन सबके लिए है जो अपनी जरूरत से ज्यादा इकठ्ठा कर के रखते हैं। सारा जमाना अपनी जरूरत से ज्यादा धन दौलत कमाने की अंधी दौड़ में लगा है।

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लालची फकीर

लालची फकीर

कहानी
मुहम्मद इस्माइल खान

सड़क किनारे एक मस्जिद के सामने दो फकीर भीख मांगा करते थे। उनमें एक बहुत संतोषी स्वभाव का था तो दूसरा बहुत लालची। मस्जिद के पास ही एक बुजुर्ग की दरगाह थी। श्रद्धालु रोज शाम को गरीबों ओर फकीरों को खाना, फल इत्यादि बांटने आते थे। संतोषी फकीर को जब पेट भरने लायक खाना मिल जाता तो वह लोगों से खाना लेने से मना कर देता। कोई कहता की बाबा ले लो कल खा लेना। वह कहता -खुदा तुम्हारा भला करे, आज जैसे तुम खाना लेकर आए हो कल भी खुदा तुम्हारे जैसे किसी नेक बन्दे को भेजेगा। मेरा खाना तो उसी खुदा के जिम्मे है।

दूसरा लालची फकीर हर किसी से खाना ले लेता और लोगों से चिपट चिपट कर खाना,फल और पैसे मांगता रहता। रोज उसके पास उसकी जरूरत से ज्यादा खाना इकठ्ठा हो जाता, जिसे वह खा न पाता, पर उसका लालची मन लोगों से और खाना लेकर इकठ्ठा करने से अपने आप को रोक न पाता। देर रात पेटभर खाना खा लेने के बाद बचा हुआ ढेर सारा खाना, फल, पैसे इत्यादि अपने कपड़े की पोटली में बांधकर सिरहाने रख लेता। दोनों फकीर वहीं फुटपाथ पर सो जाते। संतोषी फकीर बेफिक्र होकर गहरी मीठी नींद का आनन्द लेता तो लालची फ़क़ीर सारी रात ठीक से सो न पाता। उसे अपनी पोटली में रखे खाने की फिक्र लगी रहती जो कल उसके किसी काम का नहीं रहेगा। संतोषी फकीर बेफिक्र, चिंतारहित और मस्त रहता, जबकि लालची फकीर रात को ठीक से सो न पाने की वजह से बीमार और चिड़चिड़ा रहने लगा।

संतोषी फकीर उसकी यह हालत देखकर उससे यह कहता-क्यों इकठ्ठा करता है इतना खाना जिसे तू खा नहीं पाता। अगर तू न ले तो और किसी भूखे का पेट भर सकता है। और यह दूसरे दिन खाने लायक भी नहीं रहता। तू खुदा पर भरोसा क्यों नहीं करता? देख मैं भी तेरे साथ इसी फुटपाथ पर हूं। तू देखता है वह मालिक मेरे लिए इसी फुटपाथ पर रोज खाना भेज देता है तो मैं क्यों चिंता करूं। क्यों मैं व्यर्थ में ज्यादा खाना जमा करके परेशानी में पड़ंू? पर संतोषी फकीर की बात लालची फकीर के समझ में नहीं आती। वह सोचता संसार में सभी लोग जिनमें पढ़े लिखे और समझादार भी हैं मालदार होने के बाद भी और पैसा और माल जमा करने में लगे हैं और यह खाना जमा करने को ही मना करता है। उसकी नजर में संतोषी फकीर मूर्ख ही था। रात को जब दोनों फकीर खाना खाने बैठते तो संतोषी फकीर अपना पेटभर खाना खा लेता और अपना बर्तन साफ कर सिरहाने रखकर सो जाता।

लालची फकीर के सामने ढेर सारा खाना होता, उसे समझ में न आता क्या खाएं क्या छोड़ें? वह हड़बड़ी में चैन से खाना न खा पाता और सड़क के कुत्ते उसके पास आकर उसके खाने पर टकटकी लगा कर उसकी बेचैनी को और बढ़ा देते। खाने की गंध पाकर कई कुत्ते रातभर उसके आसपास मंडराते रहते। फकीर उस खाने की चिंता में जो कल उसके कोई काम न आएगा रात भर ठीक से सो न पाता। कुत्ते मौका देखकर उसके सिरहाने से पोटली खींचने लगते, वह हड़बड़ाकर नींद से उठ कर उन कुत्तों के पीछे भागता। कुत्ते दूर चले जाते तो फिर आकर सोने की कोशिश करता और इस तरह वह रात भर सो न पाता।

एक दिन वह इसी तरह कई रातों का जागा हुआ था। रात में जब उसकी आंख लग गई तो उस पोटली के लिए कुत्तों के एक झाुण्ड ने उस पर हमला कर दिया। कुत्तों ने उसकी पोटली फाड़ कर सारा खाना सड़क पर बिखेर दिया। वह कुत्तों से उलझ गया। कुत्तों ने उसे जगह जगह काट कर जख्मी कर दिया। सड़क पर बिखरा हुआ खाना कुत्ते तो खा सकते थे पर उसके किसी काम का नहीं रह गया था।

सुबह संतोषी फकीर ने उसकी यह हालत देखी तो कहने लगा - मैं न कहता हूं कि अपनी जरूरत से ज्यादा माल इकठ्ठा करना अपने लिए भारी मुसीबत को बुलाना है। यह नियम सिर्फ तुम्हारे लिए ही नहीं दोस्त, यह उन सबके लिए है जो अपनी जरूरत से ज्यादा इकठ्ठा कर के रखते हैं। सारा जमाना अपनी जरूरत से ज्यादा धन दौलत कमाने की अंधी दौड़ में लगा है। उसमें सही गलत तरीका कुछ भी नहीं देखते, उसमें दूसरों का भी हक मारा जाता है, जैसे तू दूसरे गरीबों के हिस्से का खाना समेट लेता है। उन गरीब भूखों की बद्दुआ तुझो जरूर लगती होगी। वह दयाराम कभी-कभी मेरे पास आकर बैठता है। अखबार पढता है, तो बताता है कि कितने धन्ना सेठों के यहां पुलिस छापे डालती है और उनके काले धन के साथ उनका अच्छा माल भी ले जाती है। फिर जेल की हवा खाओ। सबकुछ बर्बाद हो जाता है। इज्जत और ईमानदारी से मालिक जितना दे दे उस पर सब्र करो। प्रभु इच्छा समझ कर सब्र करो।

आठ पंद्रह दिन बाद वह लालची फकीर कुत्ते की तरह आवाजें निकालने लगा और सड़क पर जाते राहगीरों को काटने दोडऩे लगा। उसे रेबीज हो गया था। किसी राहगीर की शिकायत पर उसे पकड़कर रस्सियों से बांधकर कुत्ते पकडऩे वाली गाड़ी में डालकर ले गए । फिर पता लगा शायद उसकी मौत हो गई ।