
Good News: लेजर से फाइब्रॉएड का सफल ऑपरेशन, महिलाओं को यूटरस हटाने के दर्द से मिलेगा छुटकारा
जयपुर। गर्भाशय में फाइब्रॉएड (गांठ) से पीड़ित महिलाओं के लिए खुशखबरी है। क्वांटा लेजर तकनीक अब ऐसी महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। इस तकनीक से न केवल हिस्टेरेक्टॉमी गर्भाशय हटाने की सर्जरी से छुटकारा मिल रहा है। साथ ही महिलाओं के खुशहाल और स्वस्थ जीवन जीने की राह भी आसान हुई है। जयपुर की एक महिला चिकित्सक ने लेजर तकनीक से श्रीगंगानगर की 42 साल की महिला का इलाज कर सफलता हासिल की है। मालवीय नगर स्थित एक निजी हॉस्पिस्टल की एडवांस गायनी लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ.कविता गोयल ने सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड का हिस्टेरोस्कोपिक लेजर एनन्यूक्लियेशन क्वांटा लेजर तकनीक की सहायता से महिला का ऑपरेशन किया।
साढ़े तीन सेंटीमीटर का सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड
डॉ. गोयल ने बताया कि महिला की जांच में पता चला कि उसके गर्भाशय में साढ़े तीन सेंटीमीटर का सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड था। गर्भाशय की आंतरिक परत के नीचे मांसपेशियों की परत में विकसित होने वाली गांठों को सबम्यूकोसल कहा जाता है और गर्भ की गुहा में बढ़ती है। अभी तक बड़े चीरे का ऑपरेशन करके फाइब्राइड के साथ यूटरस को निकाल दिया जाता था। ऐसे ऑपरेशन में अधिक रक्तस्राव, एंटीबॉयटिक दवाओं का प्रयोग और कई दिनों तक मरीज को बेड रेस्ट पर रहना पड़ता था। इस महिला को भी ऑपरेशन कर गर्भाशय निकालने की सलाह दी गई थी। महिला के किसी परिचित की सलाह पर अस्पताल में आने के बाद उसमें उम्मीद की किरण जागी। अस्पताल में भर्ती कर महिला का क्वांटा लेजर तकनीक से इलाज किया गया। इस दौरान गर्भाशय में सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड पर वायर से करंट छोडकर गांठ के रक्त प्रवाह को रोक दिया गया। इसके बाद फाइब्रॉएड को यूं ही दिया गया। एक-दो महीने में गांठ अपने आप ही गल जाती है। इस तकनीक में रक्तस्राव नगण्य होता है। मरीज को दर्द भी कम होता है। 24 घंटे के अंदर मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज होकर घर चला जाता है। खास बात यह है कि किसी प्रकार का संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता है। इसके बाद मरीज नार्मल जीवन जी सकता है।
Published on:
08 May 2023 02:13 pm
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