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ऐसा क्या हुआ कि चार दोस्तों ने ट्रेन के आगे लगा दी मौत की छलांग

तीन की मौत और एक गंभीर

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तीन की मौत और एक गंभीर

ऐसा क्या हुआ कि चार दोस्तों ने ट्रेन के आगे लगा दी मौत की छलांग

अलवर.

इसे नौकरी नहीं मिलने का तनाव कहें या युवकों के जेहन में उपजी रौंगटे खड़ी करने वाली कुंठा। मंगलवार देर शाम एफसीआई गोदाम के पास चार दोस्तों ने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। जिनमें से तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के दौरान दो अन्य साथी युवक भी मौजूद थे। जिनसे पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
पुलिस ने बताया कि रैणी के बहडक़ो कलां निवासी मनोज (24) पुत्र रामभरोसी मीणा, बुचपुरी निवासी सत्यनारायण उर्फ डूटी (22) पुत्र बुल्याराम मीणा, रैणी के गांव बैरेर निवासी ऋतुराज उर्फ ऋषि (17) पुत्र बाबूलाल मीणा और टोडाभीम-करौली निवासी अभिषेक (22) पुत्र शिवदयाल मीणा अलवर में रहकर पढ़ाई व प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। मनोज, सत्यनाराण, ऋतुराज, अभिषेक और उसके साथी संतोष मीणा व राहुल मीणा मंगलवार शाम को शांतिकुंज स्थित एफसीआई गोदाम के समीप रेलवे ट्रैक के पास जाकर बैठ गए। वहां सिगरेट पीते हुए सभी दोस्त आपस में बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान सामने से ट्रेन आती देख मनोज, सत्यनाराण, ऋतुराज और अभिषेक ने अचानक दौडक़र ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। हादसे मनोज, सत्यनारायण और ऋतुराज की मौके पर मौत हो गई, जबकि अभिषेक गंभीर रूप से घायल हो गया। अचानक हुए हादसे को देख उनके साथी संतोष और राहुल घबरा गए। पहले तो उन्होंने रेलवे ट्रैक पर शवों को तलाशने का प्रयास किया। उसके बाद उन्होंने सत्यनाराण के भाई सुरेन्द्र व अन्य साथियों को घटना की सूचना दी। रात ११.४० बजे अरावली विहार थाना पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। अब तक की पुलिस पड़ताल में सामने आया है कि चारों युवकों ने नौकरी नहीं लगने को लेकर मन में निराशा का भाव जागृत के कारण ट्रेन के आगे छलांग लगाई। मृतकों के साथ राहुल और संतोष से गहनता से पूछताछ की जा रही है।

किराए पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे सभी
मृतक मनोज और सत्यनारायण स्नातक थे और अलवर में किराए पर रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। रितुराज उर्फ ऋषि अलवर के एक निजी कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में दो बार फेल हो गया था। इस बार उसने बीए प्रथम वर्ष में दाखिला लिया था। वहीं, हादसे में गंभीर घायल अभिषेक १२वीं पास है और रेलवे की तैयारी कर रहा है।

अभिषेक ने एक माह पहले भी आत्महत्या की बात कही थी
राहुल मीणा ने बताया कि करीब एक माह पहले अभिषेक कोटा में रेलवे की परीक्षा देने गया था। इसी दौरान उसका अपनी गर्लफ्रेंड से झगड़ा हो गया। अभिषेक ने उसे फोन कर कहा कि भाई आज तेरा एक दोस्त कम हो जाएगा। मैं मर रहा हूं। उसने अभिषेक से पूछा कि वह कहां हैं तो अभिषेक बोला कि वह कोटा से ट्रेन में बैठकर जयपुर आ रहा है। इसके बाद राहुल ने ये बात अन्य दोस्तों को बताई। सभी दोस्त तुरंत किराये की गाड़ी लेकर जयपुर पहुंचे। जयपुर जंक्शन पर काफी देर अभिषेक का इंतजार किया। जब वह नहीं मिला तो सभी दोस्त उसके जगतपुरा स्थित किराये के कमरे पर पहुंचे। वहां अभिषेक उन्हें मिल गया।

वीडियो से कनेक्शन तो नहीं!
फेसबुक पर सत्यनारायण की सत्या भगत के नाम से चल रही आईडी पर हादसे के कुछ घण्टे पहले ‘माही द किलर’ नाम से एक शोर्ट वीडियो स्टोरी अपलोड की गई है। कहीं इस वीडियो से हादसे का कनेक्शन तो नहीं है। वीडियो में एक युवक पार्क में आकर सिगरेट पीता है। पूरे तनाव में मोबाइल पर बात करता है और कहता है कि तू चिंता मत कर मार दूंगा उसे। फिर वह कार से निकलता है। आगे एक युवक को गाड़ी सेे कुचलकर मार देता है। इस वीडियो को अपलोड करने के बाद ही रेल से यह घटना हुई है। हालांकि यह जांच में ही स्पष्ट होगा कि वीडियो का घटना से कोई सम्बंध है या नहीं।

हादसे की कहानी, राहुल की जुबानी
-हम सब मरेंगे, तू भी मरेगा क्या
अलवर. मंगलवार शाम 6.30 बजे मालवीय नगर निवासी राहुल के फोन की घंटी बजी। दोस्त सत्यनारायण उर्फ डूटी का फोन था। उसने एफसीआई गोदाम के समीप बुलाया। कोई जरूरी काम बताकर जल्दी आने को कहा तो मैं पैदल ही 15 मिनट में उसके पास जा पंहुचा। गोदाम के पास पटरियों पर सत्यनारायण बैठा था। उसके साथ दोस्त मनोज, अभिषेक, ऋतुराज और संतोष रेलवे पटरियों पर बैठकर सिगरेट पी रहे थे। मैं भी उनके साथ सिगरेट पीने लगा। इसी दौरान हंसी मजाक करते हुए सत्यनारायण बोला, यार अब तो जीने से धाप गए हैं। हम सब तो मरेंगे, तू भी मरना चाहता है तो बता। मैंने कहा भाई मैं क्यों मरुं, अगर मैं मर गया तो मेरे घरवाले मर जाएंगे। पर तुम क्यों मरना चाहते हो ? सत्यनारायण बोला, देख नौकरी लगेगी नहीं और खेतों में काम हमसे होगा नहीं तो जी कर क्या करेंगे, दूसरों को तकलीफ ही देंगे।
मैंने सत्यनारायण से बोला कि ये फालतू के ख्याल दिमाग से निकाल दो। मैंने कहा, भाई सुबह से कुछ नहीं खाया है चलो कमरे पर चलते हैं खाना खाएंगे। इतने में सत्यनारायण बोला कि अपने पास एटीएम और पैसे हैं, आधे घंटे रुक होटल पर खाना खाएंगे। इसके बाद हम सभी आपस में हंसी-मजाक करने लगे। फिर सभी दूसरे ट्रैक पर जाकर बैठ गए। अचानक सत्यनारायण दोस्त मनोज, अभिषेक, ऋतुराज और संतोष से बोला कि अब मरना है... सभी अपने घरों पर तो बात कर लो। फिर वह चारों इधर-उधर फोन मिलाकर बात करने लग गए। इतने में ही सामने से जयपुर-चण्डीगढ़ ट्रेन आई.... मैं कुछ समझ पता इससे पहले ही चारों ने ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। पलक झपकते ही उनके चीथड़े उड़ गए। मैं और संतोष अचानक समझ ही नहीं पाए कि क्या हुआ है? ट्रैक पर अंधेरे में कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। अचानक घबराकर हम दोनों वहां से भाग आए। मैं सत्यनारायण के कमरे पर गया और उसके भाई सुरेंद्र को सूचना दी। वहां से अभिषेक के भाई और कुछ अन्य दोस्तों को भी सूचना दी और सब मिलकर ट्रैक पर वापस आए। वहां से घायल अभिषेक को अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचित किया।