
प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ
Menace of stray Dogs: जयपुर। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा श्वानों के मामले पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के दो जज अवारा श्वानों के कारण दुर्घटना का शिकार हुए हैं और एक जज अभी भी रीढ़ की हड्डी की चोट से जूझ रहे हैं। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने सुनवाई शुरू करते हुए कहा, 'आज हम सबको समय देंगे, किसी को शिकायत न रहे कि उसे नहीं सुना गया, पहले पीड़ितों को सुनेंगे, फिर डॉग लवर्स को'।
कोर्ट ने राज्य राजमार्गों, नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा पशुओं को हटाने का भी निर्देश दिया था। बुधवार को सुनवाई में एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल ने इस मामले में रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कोर्ट में कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को एसओपी तैयारी करने के लिए कहा गया था और उन्होंने एसओपी तैयार कर ली है। गौरव अग्रवाल ने बताया कि एनएचएआइ का कहना है कि 1400 किलोमीटर का संवेदनशील क्षेत्र है, जिसकी देखभाल राज्य सरकार को करनी होगी।
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता की तरफ से एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि एनएचएआइ की तरह रेलवे मंत्रालय को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि रेलवे स्टेशन पर घटनाएं सामने आ रही हैं। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि रेलवे ने इन्फ्रारेड ट्रैकिंग का समाधान निकाला है।
सिब्बल ने कहा कि अगर वहां कोई ऐसा श्वान है तो सेंटर को कॉल कर सकते हैं। वे श्वान की नसबंदी कर देंगे और फिर उसको वापस छोड़ दिया जाएगा। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने तंज कसते हुए कहा, 'हां फिर एक ही चीज रह जाएगी कि श्वानों की काउंसलिंग की जाए कि वो किसी को न काटे'।
कपिल सिब्बल ने जस्टिस संदीप मेहता की टिप्पणी पर कहा कि उन्हें लगता है कि ये मजाकिया अंदाज में कहा गया है, उन्होंने कहा कि अगर हमें दिक्कत है तो इसका मतलब ये तो नहीं कि हम क्रूर हो जाएं। जस्टिस संदीप मेहता ने कहा, 'यह सिर्फ काटने की बात नहीं है, यह श्वानों की वजह से होने वाली घटनाओं की भी बात है। आप कैसे पता कर सकते हैं कि सुबह-सुबह किस श्वान का क्या मूड है, आपको नहीं पता होता है।
एमिकस ने बताया कि राज्य कोर्ट के आदेश के पालन का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन शेल्टर होम और स्टरलाइजेशन सेंटर का अभाव है। उन्होंने बताया कि आदेश के अनुसार मवेशियों और आवारा कुत्तों को शेल्टर में रखने का निर्देश दिया गया है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जाना होगा. उन्होंने कहा कि मेल डॉग्स को पहले स्टरलाइज किया जाए, ताकि आवारा श्वानों की आबादी को कंट्रोल किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि एबीसी सेंटर में भी मैन पावर की जरूरत होगी। राज्यों को भी हलफनामे दाखिल करने थे और अभी तक 10 एफिडेविट मिले हैं।
कोर्ट ने इस पर पूछा कि किन राज्यों ने हलफनामे दाखिल नहीं किए हैं, एमिकस क्यूरी ने बताया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और पंजाब जैसे बड़े राज्यों ने दाखिल नहीं किए हैं, साथ ही सिक्किम जैसे छोटे राज्य भी इनमें शामिल हैं।
Updated on:
07 Jan 2026 01:50 pm
Published on:
07 Jan 2026 01:48 pm
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