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कचरे के पहाड़ों की बदली ‘सूरत’… इंदौर ने बना दिए गार्डन, जयपुर बदबू से बेहाल

परिणाम के बाद आयुक्त पहुंची कचरागाह, ट्रांसफर स्टेशन भी देखे राजधानी में बन रहे कचरे के पहाड़, संवारने का कोई जतन नहीं

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जयपुर

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GAURAV JAIN

Jan 14, 2024

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स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में रैंक गिरने के बाद दोनों ही शहरी सरकारें अब अगले सर्वेक्षण की तैयारी में जुट गई हैं। शनिवार को छुट्टी के दिन ग्रेटर नगर निगम महापौर रूकमणी रियाड़ फील्ड में निकलीं। पहले ट्रांसफर स्टेशन देखे। उड़ रहे कचरे को ढकने के लिए आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए। उसके बाद सेवापुरा कचरागाह पहुंचीं। मानसून से पहले कचरे के पहाड़ को खत्म करने के निर्देश दिए। यानी निगम अधिकारियों को अगले छह माह में कचरे के पहाड़ों का निस्तारण करना होगा।

दरअसल, राजधानी के कचरागाहों में पिछले 20 वर्ष में कचरे को निस्तारित करने पर कोई काम नहीं हुआ है। यही वजह है कि सेवापुरा, लांगडि़यावास और मथुरादासपुरा में कचरे के पहाड़ बन चुके हैं। जो शहर स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल कर पाए हैं, उन्होंने कचरे के पहाड़ों की सूरत ही बदल दी। राजधानी जयपुर में ऐसी कोई प्लानिंग ही नहीं है।

बदली सूरत, तब बना नम्बर बन

सूरत शहर ने नम्बर वन आने के लिए काफी मेहनत की। करीब 57 लाख मीट्रिक टन कचरे को लैंडफिल (कूड़ा-कचरा निपटान की प्रणाली जिसमें अपशिष्ट को धरती की परतों के बीच दबा दिया जाता है) कर दो गार्डन बना दिए। जो हिस्सा बचा है, उसमें तीसरा गार्डन बनाने की तैयारी की जा रही है। इसी तरह इंदौर ने भी कचरागाह को खत्म कर खूबसूरत पार्क बना दिए। कई शहरों में बच्चों के खेलने की जगह भी विकसित की गई है।

यहां ट्रांसफर स्टेशन में उड़ता है कचरा, आती है दुर्गंध

राजधानी के दोनों नगर निगम में 11 ट्रांसफर स्टेशन हैं। हूपर कचरा लाकर यहां डालते हैं। ज्यादातर ट्रांसफर स्टेशन पर कचरा शाम तक उठता है। कुछ ट्रांसफर स्टेशन ऐसे भी हैं, जहां दूसरे दिन तक कचरा पड़ा रहता है। ऐसे में कचरा उड़ता रहता है। दुर्गंध की वजह से आस-पास की कॉलोनियों के लोग परेशान रहते हैं। मानसरोवर िस्थत ट्रांसफर स्टेशन को हटाने के लिए कलक्टर भी निगम को निर्देश दे चुके हैं, लेकिन निगम ने अनसुना कर दिया।

इंदौर और मुम्बई ऐसे कर रहे कचरे का संग्रहण

इंदौर में कचरा ट्रांसफर के कई स्टेशन हैं। यहां कचरा एकत्र ही नहीं किया जाता बल्कि रिफ्यूज कॉम्पेक्टर (आरसी) किया जाता है। रिफ्यूज कॉम्पेक्टर एक मशीन या तंत्र होता है। इसका इस्तेमाल कर कचरे जैसी चीजों के आकार को कम कर दिया जाता है। इससे कचरे की मात्रा काफी कम हो जाती है। इंदौर में ये स्टेशन ढके रहते हैं और शाम को कीटनाशक डालकर सफाई होती है। वहीं, मुम्बई में रिफ्यूज कॉम्पेक्टर मशीन को सड़कों पर ही उतार दिया। इससे कचरे को तुरंत ही आरसी कर ट्रांसफर स्टेशन भेज दिया जाता है।