
राज्य सरकार ने सरोगेसी को लेकर नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब महिला एक बार ही किराए की कोख दे पाएगी। एक बार कोख किराए पर देने पर दूसरी बार अनुमति नहीं मिलेगी, भले ही वह महिला दूसरी शर्तें पूरी करती हो। इनफर्टिलिटी विशेषज्ञों का मानना है कि नए दिशानिर्देशों से अनियमितताएं कम होंगी। राज्य सचिवालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि सरोगेसी का सहारा तभी लिया जा सकता है, जब कोई शारीरिक बाधा या स्वास्थ्य समस्या हो।
मेडिकल बोर्ड से लेना होगा प्रमाण पत्र
इच्छुक निसंतान दंपती को जिला स्तरीय सरोगेसी मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र लेना होगा। अंतिम स्वीकृति राज्य स्तरीय सरोगेसी उपयुक्त प्राधिकारी देंगे। सरोगेसी तभी दी जाएगी जब महिला को एंडोमेट्रियल समस्या हो या सहायक प्रजनन तकनीक के साथ भी गर्भधारण न कर पा रही हो। बीमारी के कारण गर्भावस्था का खतरा है, या बार-बार गर्भपात हो रहा है, तभी वह गर्भ किराए पर ले सकती है।
यह होना चाहिए
सरोगेसी के लिए महिला को सिंगल मदर या शादीशुदा होना चाहिए। लिव इन में रह रही महिलाओं के लिए यह प्रावधान लागू नहीं होगा। इसके साथ ही बच्चा जीवित होने पर भी दंपती किराए पर गर्भ नहीं ले पाएंगे।
सरोगेट मां को होना होगा विवाहित
वहीं सरोगेट मां विवाहित होनी चाहिए और कम से कम एक जीवित बच्चे की मां होनी चाहिए। ऐसी महिला को स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र देना होगा। सरोगेट दंपती को उसके तीन साल के स्वास्थ्य बीमे की जिम्मेदारी लेनी होगी। सरोगेट दम्पती की उम्र 26-55 साल और पत्नी की उम्र 23-50 साल के बीच होनी चाहिए।
कम होगी अनियमितताएं
इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. सुदर्शन घोष दस्तीदार को उम्मीद है कि नए दिशानिर्देशों से अनियमितताएं कम होंगी। वे सरोगेसी कानून के मसौदे के प्रमुख सलाहकारों में से एक हैं।
व्यवसायीकरण रोकने की पहल
ऑल बंगाल पैरामेडिक्स एंड मेडिकल टेक्नोलाजिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज चक्रवर्ती के मुताबिक सरकार का निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए है कि कोख किराए देने की प्रथा कहीं व्यवसायीकरण का शिकार न बन जाए।
Published on:
10 Dec 2022 09:55 pm
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