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मौसम का मिजाज बदल रहा है लेकिन स्वाइन फ्लू को लेकर चिकित्सा विभाग फिलहाल तैयारी के मूड में नहीं दिख रहा। हालांकि राहत की बात है कि स्वाइन फ्लू फिलहाल नहीं है लेकिन एहतियातन व्यवस्थाएं भी नहीं हैं। उलटे, राज्य के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस में तो स्वाइन फ्लू वार्ड ही खत्म कर दिया गया है।
स्वाइन फ्लू पीडि़तों के लिए पहले वार्ड बना था
एसएमएस अस्पताल में आपातकालीन इकाई के पास कक्ष नम्बर 5 को स्वाइन फ्लू संदिग्धों व पीडि़तों के लिए वार्ड बनाया हुआ था। बाद में इसमें कैंसर रोगियों व कीमोथैरपी के मरीजों को भी भर्ती किया जाने लगा।
अब नहीं है वार्ड
हाल ही एक आदेश जारी कर वहां स्वाइन फ्लू मरीजों को भर्ती करने से मना कर दिया गया है। कार्मिकों का कहना था कि अब यहां कीमोथैरपी के मरीज और आपातकालीन इकाई से आने वाले रोगी ही भर्ती होते हैं। सूत्रों के अनुसार स्वाइन फ्लू पीडि़तों के लिए आइसोलेशन वार्ड की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
आंकड़े चिन्ताजनक, मगर बेफिक्री
प्रदेश में पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो स्थिति चिन्ताजनक नजर आती है। वर्ष 2015 में करीब 26 हजार का सैंपल टेस्ट किया गया, जिनमें 6900 रोगी पॉजीटिव पाए गए। स्वाइन फ्लू ने इस दौरान 472 लोगों की जान ले ली।
इसके अगले साल वर्ष 2016 में 200 रोगी पॉजीटिव पाए गए और 43 की मौत हो गई। वहीं, इस साल अब तक 65 के सैंपल टेस्ट किए गए। इनमें से 11 रोगी पॉजीटिव पाए गए और 4 की मौत हो चुकी है।
जयपुर शहर सहित सभी जिला मुख्यालयों पर अलर्ट जारी किया गया है। जहां भी अचानक बुखार के रोगियों की संख्या बढऩे की बात सामने आएगी, वहां राहत के उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे। निजी चिकित्सालयों को भी नजर रखने, स्वाइन फ्लू संबंधी जानकारी तत्काल देने को कहा गया है।
नरोत्तम शर्मा, सीएमएचओ, जयपुर-प्रथम
जयपुरिया : मरीज गया तो लगाए ताले
जयपुरिया अस्पताल में स्वाइन फ्लू से पीडि़त स्त्री-पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई, स्वाइन फ्लू आइसीयू भी बनाया। लेकिन, पिछले दिनों भर्ती रोगी के जाने के बाद वार्ड व आईसीयू कक्ष पर ताला लगा दिया गया।
Published on:
06 Mar 2017 11:38 am
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