
नि वेश को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार की ओर से बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर निवेश लाने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे।
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए केन्द्र सरकार ने मैक इन इंडिया, स्टार्टअप और राज्य सरकार रिसर्जेन्ट राजस्थान जैसे बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत जानने की सरकारी मशीनरी को फुर्सत तक नहीं है। कोटा के उद्यमी चाहते हैं कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए छोटे-छोटे प्रयासों की जरूरत है। नीतियों व करों का सरलीकरण होना चाहिए।
राजस्थान पत्रिका के तत्वावधान में शनिवार को पुरुषार्थ भवन में केन्द्रीय व राज्य बजट से पूर्व आयोजित टॉक शो में शहर के औद्योगिक, व्यापारिक, चार्टर्ड एकाउन्टेंट व कर विशेषज्ञों ने यह बात कही।
टॉक शो में एसएसआई एसोसिएशन, कोटा व्यापार महासंघ, लघु उद्योग भारती, हाड़ौती कोटा इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन, टैक्स बार एसोसिएशन, एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे। प्रतिभागियों ने बजट से उम्मीदों के बारे में राय जताई।
गुजरात में लागू सर स्कीम से औद्योगिकीकरण, शहरीकरण में विकास हुआ है। यह स्कीम राजस्थान में भी लागू होनी चाहिए। जीएसटी लागू होने से व्यापारियों, उद्यमियों को टैक्स में राहत मिलेगी। यह जल्द से जल्द लागू होना चाहिए। रेल फ्लेट कॉरिडोर बने।
गोविंदराम मित्तल, संस्थापक अध्यक्ष, दि एसएसआई एसोसिएशन
महंगाई दर के मद्देजनर आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर पांच लाख की जाए। कर प्रावधान स्पष्ट होने चाहिए। इनपुट टैक्स क्रेडिट में भी अस्पष्टता है, सरकार इसे स्पष्ट करे। आयकर छूट आधारित औद्योगिक जोन विकसित किए जाएं।
एम.एल. पाटौदी, वरिष्ठ कर सलाहकार
आईएल संचालन के लिए केंद्र सरकार द्वारा विशेष पैकेज की घोषणा की जाए। कोटा स्टोन को रुग्ण इकाई घोषित किया जाए। दो लाख से अधिक की ज्वैलरी खरीदने पर पैन कार्ड की अनिवार्यता समाप्त हो।
क्रांति जैन, अध्यक्ष, कोटा व्यापार महासंघ
औद्योगिक विकास के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा की जाए। आयात-निर्यात जोन स्थापित किया जाए। हवाई सेवा व नया हवाई अड्डा बनाया जाए। स्टोन पार्क की स्थापना की जाए। जीएसटी जल्द लागू होना चाहिए। देर से व्यापारियों को नुकसान हो रहा है।
अशोक माहेश्वरी, महासचिव, कोटा व्यापार महासंघ
वैट की बढ़ाई गई दर वापस की जाए। कोटा में एक बड़े उद्योग लाने की सरकार की ओर से प्रयास होने चाहिए। आईएल को बंद होने से बचाएं।
राकेश जैन, अध्यक्ष, जीएमए प्लाजा
आयकर छूट की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। सर्विस टैक्स की सीमा दस लाख से बढ़ाकर 25 लाख की जानी चाहिए। सेवाकर की स्लैब घटाकर 13 प्रतिशत की जानी चाहिए।
एन.एन. द्विवेदी, कोटा डिवीजनल एम्प्लॉयर्स एसोसिएशन
आयकर की लिमिट एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ की जाए। ताकि उद्यमी अधिक से अधिक व्यवसाय करें। टीडीएस कटौती का प्रावधान समाप्त किया जाए।
विपिन सूद, अध्यक्ष, दि एसएसआई एसोसिएशन कोटा
मल्टीपल उत्पाद आधारित स्पेशल आर्थिक जोन स्थापित किए जाएं। कोटा से हावड़ा, कोटा से दिल्ली के लिए रेल बजट में घोषणा की जाए। डकनिया स्टेशन को विकसित किया जाए, इसका नाम न्यू कोटा स्टेशन के नाम से किया जाए।
मिलिंद विजयवर्गीय, चार्टर्ड एकाउंटेंट
रीको की समस्त औद्योगिक इकाइयों को नगरीय कर से मुक्त किया जाए। साथ ही, कोचिंग संस्थानों को सर्विस टैक्स से मुक्त किया जाए। कोचिंग का स्पेशल जोन भी विकसित किया जाना चाहिए।
तरुण जैन, कम्पनी सेकेट्री, कॅरियर, प्वाइंट यूनिवर्सिटी
ऑनलाइन शॉपिंग का ट्रेंड बढऩे से छोटे कारोबारियों के व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्हें व्यवसाय बढ़ाने के लिए ब्याज मुक्त ऋण दिया जाए। कर प्रणाली का सरलीकरण किया जाए।
राजकुमार विजयवर्गीय, कर सलाहकार
औद्योगिक क्षेत्र का कनवर्जन किया जाए। रीको के नियमों में सरलीकरण किया जाए। स्लरी आधारित उद्योग की स्थापना के लिए सरकार को प्रयास
करना चाहिए।
हरीश प्रजापति, महासचिव, कोटा स्टोन ट्रेडर्स एसोसिएशन
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