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स्वाद लाजवाब, लोगों को भाया चौमूं का बेर

—बेर की हाइब्रिड किस्में भी लगा रहे किसान—बेर की महक लोगों को कर रही है आकर्षित—खेतों में बेरों से लदकद झाडिय़ां छोटा, गोल व स्वाद में लाजवाब, ये है चौमूं के बेर की पहचान। अपने स्वाद व गुणवत्ता के लिए मशहूर चौमूं के बेर की स्थानीय ही नहीं बल्कि जयपुर, अलवर, बीकानेर, सीकर में खासी मांग है। फलों में यहां का बेर किसानों की आमदनी का मुख्य जरिया है।

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जयपुर

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VIKAS MATHUR

Feb 07, 2023

स्वाद लाजवाब, लोगों को भाया चौमूं का बेर

स्वाद लाजवाब, लोगों को भाया चौमूं का बेर

50 किलो से डेढ़ क्विंटल तक मिलता उत्पादन
एक बड़ी झाड़ी के पेड़ से 50 किलो से डेढ़ क्विंटल तक उत्पादन मिल जाता है। स्थानीय स्तर पर यह 30 से 50 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक जाता है। दोसौ हेक्टेयर क्षेत्र में चार सौ से अधिक किसान बेर की खेती कर रहे हैं।

चमेली व बगवाड़ी बेर
चौमूं के अलावा चीथवाड़ी, सामोद, बांसा,महारकला, निमड़ी, मोरिजा व आस- पास के गांव के खेतों में झाडिय़ां बेरों से लदकद हैं। इसका उत्पादन 15 जनवरी से अप्रेल तक होता है। बेरों की खुशबू इधर से गुजरने वालों को बरबस ही आकर्षित करती हैं। किसान बरसों से बेर की खेती कर रहे हैं। बेरों की दो स्थानीय किस्म हैं- चमेली बेर, जो छोटा व गोल होता है । दूसरा बगवाड़ी बेर जो कि मोटा होता है। हालांकि अब किसान हाइब्रिड में थाई एप्पल बेरों की किस्में भी लगा रहे हैं।

इनका कहना है—
चौमूं का बेर स्वाद में लाजवाब होता है। इन दिनों बेर का पीक सीजन है। उत्पादन शुरू हो गया है। हालांकि जल स्तर गिरने के कारण अब गुणवत्ता में हल्की गिरावट आई है। कुछ किसान हाइब्रिड किस्में भी लगा रहे हैं। लेकिन चौमूं के बेर की अलग पहचान है।
डॉ.एन.के. गुप्ता, उद्यान विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र, चौमू

भगवान सहाय यादव — जयपुर