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literacy: साक्षरता के लिए टीचर और टेक्नोलॉजी को सक्रिय करना होगा

यदि हमें 100 प्रतिशत आधारभूत साक्षरता ( basic literacy ) प्राप्त करनी है तो 'टीÓ यानि कि टीचर ( teacher ) और टेक्नोलॉजी ( technology ) को सक्रिय करना होगा। दुर्भाग्य से भारत में अभी भी डिजिटल शिक्षा ( digital education ) के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं है।

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जयपुर। यदि हमें 100 प्रतिशत आधारभूत साक्षरता प्राप्त करनी है तो 'टीÓ यानि कि टीचर और टेक्नोलॉजी को सक्रिय करना होगा। दुर्भाग्य से भारत में अभी भी डिजिटल शिक्षा के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं है। यह कहना है स्क्वेयर पांडा इंडिया के एमडी आशीष झालानी का। वे स्पष्ट करते हैं कि टेक्नोलॉजी बेस्ड सोल्यूशन भारत के एजुकेशन सिस्टम में परिवर्तन की कुंजी है। यह स्टूडेंट्स को साक्षर बनाकर उनकी प्रगति के लिए शिक्षकों को सशक्त बनाते हैं।
आमतौर पर 60 प्रतिशत बच्चे शिक्षा के रिसोर्स तक पहुंच हासिल नही कर पाते हैं। 90 प्रतिशत से ज्यादा टीचर्स का कहना है कि रिएक्शन जानने के तरीकों के बिना ऑनलाइन क्लास में बच्चों का अर्थपूर्ण मूल्यांकन संभव नहीं है। 50 प्रतिशत से ज्यादा टीचर्स का कहना है कि ऑनलाइन क्लासेज के समय शेयर किए गए असाइनमेंट को पूरा कर पाने में बच्चे सक्षम नहीं हैं। भारत के दूर-दराज के क्षेत्रों में इंटरनेट की बेहतर उपलब्धता नही है। इसे देखते हुए 2025 तक पांच सालों में हर एक क्लास 3 के बच्चों को बेसिक साक्षरता से अच्छे से परिचित करने का केंद्र का अभियान 2026-27 तक के लिए आगे चला गया है।
हमें एजुकेशन टेक्नोलॉजी के साथ काफी कुछ करना है, लेकिन हमें इस बात को भी स्वीकार करना होगा कि भारत में आईटीसी (इन्फॉर्मेशन, कम्यूनिकेशन, टेक्नोलॉजी) साक्षरता की सफलता के लिए टीचर्स की आज जितनी भूमिका है, उतना पहले कभी नहीं रही है। बेशक आज जब टेक्स्टबुक की जगह एजुकेशनल सॉफ्टवेयर पैकेज और डिजिटल कंटेंट आ रहे हैं, लेकिन टीचर्स गाइड, फिसिलिटेटर और कॉर्डिनेटर के रूप में अपनी जगह को भी मजबूत कर रहे हैं और परम्परागत क्लासरूम की दीवारों की बाध्यताएं अब समाप्त हो रही हैं।
भारत की शिक्षा प्रणाली को फिर से जीवित करने के लिए टेक्नोलॉजी बेस्ड सोल्यूशन बहुत महत्वपूर्ण हैं, जो इसका विस्तार करते हैं। चुनौती इस बात की है कि साक्षरता सुनिश्चित करने के लिए हम कितने प्रभावी तरीके से और तेजी से डिजिटल टेक्नोलॉजी को हमारे एजुकेशनल सिस्टम में इंटीग्रेट करते हैं।
ये चुनौतियां कई प्रकार की हैं-
1. कोविड ने पहले ही दो शिक्षा सत्रों को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे बच्चों में शिक्षा का स्तर गिर सकता है। एआई और एमएल जैसी एजुकेशनल टेक्नोलॉजी इस गिरते स्तर को रोकने और व्यक्तिगत प्रतिक्रिया देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
2. तकनीक का विस्तार केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं है। एजुकेशन को ज्यादा खेलपरक बनाने का लक्ष्य है।
3. स्क्वेयर पांडा इण्डिया भारत में कई राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है और आंगनबाड़ी, बालबाडिय़ों और नंद घरों के टीचर्स को प्रशिक्षित कर रही है और उन्हें एक नई भूमिका के लिए तैयार कर रही है।
4. केवल यह महत्वपूर्ण नहीं है कि वे कौनसी नॉलेज उपलब्ध करवा रहे हैं, बल्कि आगामी सालों में ये भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा कि वे स्टूडेंट्स को कौन से स्किल्स को डवलप करने के लिए प्रयास करते हैं और कितनी संवेदनशील के साथ संवाद करने के प्रेरित करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि केवल कागजी साक्षरता ही नहीं, बल्कि इस साक्षरता को कैसे प्रभावी बनाया जाए, यह महत्वपूर्ण है। केवल अक्षरों की साक्षरता ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक साक्षरता आज के समय की जरूरत है।


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