
प्रतीकात्मक तस्वीर
राजस्थान में सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को पढ़ाने के साथ शिक्षक गीत गाएंगे और नाचेंगे भी। इतना ही नहीं वाद्य यंत्र भी बजाएंगे। शिक्षक अपनी कलात्मक प्रतिभा को श्रेष्ठ साबित करने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं में शामिल भी होंगे। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने शिक्षकों में छिपी कलात्मक प्रतिभाओं को सामने लाने की पहल की।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई एवं सरकारी योजनाओं में पूरे साल व्यस्त रहने वाले शिक्षक एवं शिक्षिकाओं के लिए अच्छी खबर है। शिक्षा विभाग अब प्रारंभिक एवं माध्यमिक शिक्षा के शिक्षकों में प्रतिभा को पहचान कर उसे बढ़ावा देने के लिए नए शैक्षणिक सत्र में रंगोत्सव कार्यक्रम आयोजित करेगा।
प्रदेश के राजकीय विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षिका के लिए जिला व राज्य स्तर पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम ऑफलाइन होगा। एक शिक्षक व शिक्षिका एक ही गतिविधि में हिस्सा ले सकेंगे।
संगीत वाद्यों पर संगतकार विद्यालय के शिक्षक या छात्र हो सकते हैं। व्यावसायिक संगीत जगत के गीतों का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। वेशभूषा, मंच सज्जा और मंच का साज सामान प्रस्तुति से संबंधित ही होगी। प्रत्येक स्तर पर भाग लेने वाले शिक्षकों को सहभागिता का प्रमाण-पत्र दिया जाएगा। विजेता प्रतिभागी को मेडल, ट्रॉफी एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
संगीत (गायन), शास्त्रीय संगीत, संगीत (गायन) पारंपरिक लोक गीत, संगीत (वादन) शास्त्रीय संगीत, शिक्षण अधिगम, शिक्षण प्रतियोगिता सामग्री निर्माण आदि प्रतियोगिता होगी। जिला स्तर पर रंगोत्सव 1 से 15 अगस्त के बीच होगा। यह कार्यक्रम राज्य स्तर पर 05-10 सितम्बर तक होगा। प्रस्तुति की अवधि 4-6 मिनट की होगी। वीडियो के माध्यम से भी एंट्री हो सकेगी।
वीडियो प्रविष्टि शामिल हो सकेगी। रंगोत्सव के लिए सरकार हर जिले को दस हजार रुपए देगी। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पर आने वाले शिक्षक और शिक्षिका को प्रमाण-पत्र एवं ट्रॉफी दी जाएगी। जिला स्तर पर मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक, समग्र शिक्षा की अध्यक्षता में निर्णायक मंडल का गठन होगा।
Published on:
24 May 2024 11:01 am
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