आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन ने शुक्रवार को दो पुलिसकर्मियों, एक एसपीओ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के 11 परिजनों को छोड़ दिया। बुधवार से पुलिसकर्मियों के परिजनों को अगवा करने का सिलसिला शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत हिज्बुल मुजाहिदीन के कमांडर रियाज नायकू के पिता समेत आतंकियों के चार रिश्तेदारों की गिरफ्तारी के बाद हुई थी। कश्मीर के हिंसक अतीत में हिरासत में लेने के बाद ऐसी अदला-बदली शायद ही देखने को मिली हो। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा आतंकियों के रिश्तेदारों की रिहाई के बाद हिज्बुल ने अगवा किए 14 लोगों को आजाद कर दिया। पुलिस ने आतंकियों के जिन दूसरे रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया था, उन्हें भी इसके बदले छोड़ दिया गया।
पिछले तीन दिनों में कश्मीर में आतंकियों द्वारा अंजाम दी गईं अपहरण और रिहाई की घटनाओं से जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों के परिवार सहमे गए हैं। जवानों का अपहरण कर उनकी हत्या करने की घटनाएं घाटी में पहले भी होती रही हैं, मगर अब आतंकियों के निशाने पर जवानों के परिवार हैं। हालांकि शुक्रवार तक सभी को आतंकियों ने रिहा कर दिया। बुधवार को पुलवामा में आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी रफीक अहमद के बेटे आसिफ अहमद का अपहरण कर लिया था। घटना से सदमे में जा चुकीं रफीक अहमद की पत्नी ने एक विडियो शेयर कर आतंकियों से उनके बेटे को छोड़ने की मार्मिक अपील की। आतंकी 22 अगस्त को ईद-उल-जुहा के बाद से अब तक 7 पुलिसकर्मियों की हत्या कर चुके हैं। ईद के दिन ही आतंकियों ने साउथ कश्मीर में तीन पुलिसवालों की घर में घुसकर हत्या कर दी थी। ये तीनों ईद मनाने अपने घर आए थे। इसके अलावा बुधवार को एस्कॉर्ट ड्यूटी में तैनात चार पुलिसकर्मियों की शोपियां में हत्या कर दी गई थी। एक पुलिसकर्मी ने पहचान ना जाहिर करने की शर्त पर कहा, ‘मैं पुलवामा में रहने वाले अपने परिवार के लिए चिंतित हूं। घर पर मेरे बच्चे, पत्नी, पिता और भाई हैं। हमारे साथियों के परिवारवालों के अपहरण की घटनाएं मुझे यहां कश्मीर में रात में सोने नहीं देती हैं।’ यही चिंता एक दरोगा ने भी जाहिर की। पुलिसकर्मी ने बताया, ‘शोपियां में हालात बहुत ज्यादा खराब हैं। मेरे रिश्तेदार और परिवारवाले वहां रहते हैं। पूरी रात उनकी चिंता में गुजर जाती है। कुलगाम में जम्मू-कश्मीर पुलिस की सशस्त्र यूनिट में काम करने वाले एक अन्य पुलिसकर्मी ने कहा, ‘कभी-कभी तो लगता है कि मैं अपने परिवार की सुरक्षा के लिए नौकरी ही छोड़ दूं। मैं कभी-कभी ही घर जा पाता हूं। पिछले साल तो एक भी दिन घर नहीं जा पाया था, लेकिन अब इस नए ट्रेंड ने हमारे मन में डर पैदा कर दिया है।’ सुरक्षाबल बंधकों को सुरक्षित रूप आतंकवादियों की कैद से छुड़ाने की रणनीति पर काम कर रहे थे कि तभी सोशल मीडिया पर हिजबुल के ऑपरेशनल कमांडर रियाज नाइकू द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया कि अब से आतंकवादी ‘आंख के बदले आंख’ की नीति अपनाएंगे। बयान में कहा गया, ‘पुलिस ने हमें आंख के बदले आंख और कान के बदले कान की नीति का पालन करने के लिए मजबूर किया है। इसके बाद सुरक्षा बलों ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए बुधवार रात को छापेमारी के बाद गिरफ्तार हिज्बुल कमांडर रियाज नायकू के पिता असदुल्लाह नायकू और आतंकी लतीफ टाइगर के रिश्तेदार गुलाम हसन और उनके दो भाई जुबैर अहमद और नदीम अहमद को शुक्रवार को रिहा कर दिया गया। इसके तत्काल बाद ही आतंकियों ने पुलवामा के सब-इंस्पेक्टर इरफान गुलजार, कॉन्स्टेबल शब्बीर अहमद जरगर और एसपीओ जावेद अहमद डार शामिल हैं। इसके अलावा पुलिसकर्मियों के रिहा हुए परिजनों में डीएसपी के भाई गौहर अहमद मलिक के अलावा शोपियां के अदनान अशरफ शाह, एक डीसपी का भतीजा, फैजान बशीर मकरू, जुबैर अहमद भट, गुलाम मोहम्मद डार, और आरिफ हुसैन को रिहा कर दिया।