
चेन्नई.
श्री वेपेरी श्वेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्य कुलबोधिसूरीश्वर के सान्निध्य में मंगलवार प्रातः साध्वी ज्ञानसुरभिनिधिश्री के मासक्षमण तप की अनुमोदनार्थ तप वंदना एवं सामूहिक सामायिक का आयोजन हुआ। इस मौके पर आचार्य हीरचंद्रसूरीश्वर का सान्निध्य प्राप्त हुआ। साध्वी के धर्मसभा में प्रवेश के साथ ही वातावरण श्रद्धा एवं भक्ति से सराबोर हो गया और ‘तपस्वी ने वंदन..’ के जयघोष से धर्मसभा गूंज उठी।
संघ अध्यक्ष तेजराज कोठारी ने स्वागत करते हुए कहा कि संघ के लिए यह गौरव की बात है कि एक के बाद एक धार्मिक अनुष्ठान निरंतर आयोजित हो रहे हैं। पूर्वाध्यक्ष रमेश मूथा ने कहा कि यह परमात्मा के शासन की कृपा और संघ के पुण्योदय का अवसर है कि गुरुदेव का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। सचिव संघवी आकाश जैन ने कहा कि मासक्षमण तप की अनुमोदना करना भी एक प्रकार की तपस्या है। उन्होंने तपस्विनी के पुरुषार्थ की अनुमोदना करते हुए सामूहिक सामायिक में सहभागी बने श्रद्धालुओं की भी सराहना की। संघ की ओर से तपस्विनी साध्वी के सांसारिक माता-पिता का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर आचार्य कुलबोधिसूरीश्वर ने साध्वी के मासक्षमण तप की अनुमोदना करते हुए कहा कि आत्मा को परमात्मा बनाना है तो पहले उसे कर्मों से खाली करना होगा। शास्त्रों में आत्मकल्याण के अनेक सूत्र बताए गए हैं, लेकिन एक सरल सूत्र है “जो खाली होता है, वही भरा जाता है।” यदि आत्मा को परमात्मा बनाना है तो भीतर का अहंकार, मोह, राग-द्वेष और कर्मों का भार कम करना ही होगा।
आचार्य ने श्रमण-श्रमणी विहार में सेवा देने वाले चेन्नई के लगभग 300 सेवकों के सम्मान की घोषणा की। गुरुवार प्रातः विशेष महामांगलिक का आयोजन एवं वासक्षेप प्रदान किया जाएगा। इसके पश्चात गिरनार की रचना तथा भगवान नेमिनाथ के जन्मोत्सव पर विशेष भक्ति का आयोजन होगा। आचार्य ने आगामी 21 से 23 अगस्त तक आयोजित अट्ठम तप की आराधना में 1,008 तपस्वियों के जुड़ने की भावना व्यक्त करते हुए श्रद्धालुओं को तपस्विनी साध्वी के हाथों से संकल्प पत्र ग्रहण करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में 'शासन गौरव' मनोज राठौड़ ने तप संवेदना और धीरज निमजीया ने संगीत की प्रस्तुति दी।
Updated on:
12 Aug 2026 06:00 am
Published on:
12 Aug 2026 06:00 am
